उरई(जालौन)। सूफियाना लहजे के विश्व प्रसिद्ध कव्वाल अजीम नाजा मुंबई और फैजान अजमेरी ने हजरत बेरी वाले बाबा के 86 वें उर्स की पहली बज्म कव्वाली में खुलकर दिल की बात शेरों के माध्यम से कही। श्रोताओं की समझ पर फिदा उक्त कव्वाल ने फनकारी के लगभग सभी रंग पेश किए।
दो दिवसीय उर्स के पहले दिन की शुरुआत कलामे रब्बानी से मौलाना इमरान ने की। जिसके बाद महफ़िले शमा का दौर शुरु हुआ। कव्वाल फैजान अजमेरी ने बज्म मे हम्द पेश करते हुए पढ़ा, ये मेरे मौला, ये मेरे अल्लाह, मुस्तफा के चाहने वालों को जन्नत चाहिए, वो करें दौलत की ख्वाहिश, जिसको दौलत चाहिए। उन्होंने सूफी शायरो के ऐसे ऐसे शेर पढ़े कि लोग चौंक उठे। उन्होंने कहा श्ये मुझसे क्या पूछते हो कहां-कहां है रसूल, जहां-जहां है खुदाई वहां-वहां है रसूलश् और श्वहां जिस्म नहीं और यहां साया नहीं है, दुनियां में कोई ऐसा नबी आया नहीं हैश्। दूसरे कव्वाल अजीम नाजा मुंबई ने पढ़ा, दीदार मुझे भी हो उस आर्श के जीने का, अल्लाह सफर लिख दे, किस्मत में मदीने का। इसके बाद जबाबी मुकाबले में कव्वाल अजीम नाजा ने कौमी एकता पर तंज कसते हुये पढ़ा, जान से ज्यादा, हमे अपना तिरंगा प्यारा है, ये हिंदुस्तान हमारा है, हिंदू मुस्लिम का, यह देखो साथ कितना प्यारा है, ये हिंदुस्तान हमारा है। इसके बाद फैजान अजमेरी ने भी अजीम नाजा पर जबाबी बार करते हुए कोमी एकता पर पढ़ा, हम कम नही किसी से जहाँ को बता दिया। ये कहके दुश्मनो को, यहां से भगा दिया, ये मेरा हिंदुस्तान है, ये मेरा हिंदुस्तान है। हालांकि दोनों ही पार्टियों को लगभग आधा-आधा समय मिला परंतु इसे अजमेरी बंधु ही सार्थक करते दिखे। संचालक जमाल अहमद पप्पू थापा ने लफ्जों को तौल-तौल कर बोला और उनका यह अंदाज़ बड़ा प्रभावी रहा। प्रोग्राम में कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी, पूर्व चेयरमैन विजय चौधरी, महेश शिरोमणि, हाफिज आशु, फ़जील खान भी अतिथि के रूप मे शामिल हुए। उर्स कमेटी के चीफ कंट्रोलर हाफिज अब्दुल जब्बार, प्रभारी अध्यक्ष कोस्तुब चतुर्वेदी ने सभी अतिथियों को सर पर साफा बांधकर स्वागत किया। फिरोज खान, भिक्के खां, रिजवान खान, जुबैर खान, छोटू शाह आदि ने व्यवस्था संभाली। इस मौके पर नजम हाशमी, पप्पू पठान, अकील खान, इबादत अली, रईस खान, शोएब मिर्जा आदि लोग मौजूद रहे।
बॉक्स...
घुंघरू की आवाज पर जमकर बरसे नोट
उरई। हजरत गाजी मंसूर अली शाह उर्फ बेरी वाले बाबा के उर्स मुबारक के पहले दिन कव्वाल फैजान अजमेरी के द्वारा जैसे ही घुंघरू की आवाज पेश की गई। तो मंच पर मौजूद अतिथि व सैकड़ों अकीदतमंदो ने फनकार फैजान अजमेरी पर नोटों की बारिश कर हौसला अफजाई की।
Post a Comment