( हिमांशु खरकया)
उरई (जालौन)। जनपद में अचानक मौसम के करवट बदलने से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। आंधी, तेज बारिश और ओलावृष्टि ने माधवगढ़ और जालौन तहसील क्षेत्र के कई गांवों में हजारों किसानों की फसल को बर्बाद कर दिया।
आज दोपहर अचानक जिले के नदिया पार क्षेत्र में ओलों की बारिश शुरू हो गई। लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही खेत-खलिहान, सड़कें और रास्ते ओलों की सफेद चादर से ढक गए। करीब आधे घंटे से अधिक समय तक हुई इस ओलावृष्टि ने गेहूं और अरहर की फसल को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है।
माधवगढ़ तहसील के ये गांव सबसे अधिक प्रभावित:
तहसील क्षेत्र के ग्राम असहना, मींगनी, सूपा, नुनायचा, भीमनगर, डिकौली आदि गांवों में गेहूं और अरहर की फसल ओलों की चपेट में आ गई। गेहूं की बालियां कतरकर जमीन पर बिखर गईं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया।
जालौन तहसील में भी भारी तबाही:
वहीं, जालौन तहसील के गोहन, गढ़िया, रहावली, कुडऊ, भाऊपुरा, जमरेही, पडकुला, कुरसेडा, दादनपुर, रंधोरा, गोरा, सिरावली और मदारीपुर सहित कई गांवों में पहले तूफान, फिर बारिश और उसके बाद ओलावृष्टि ने भीषण तबाही मचाई।
70 प्रतिशत तक फसल नष्ट होने का अनुमान:
किसानों का कहना है कि लगभग 30 मिनट तक हुई ओलावृष्टि से 70 प्रतिशत से अधिक फसल को नुकसान पहुंचा है। खेतों में पड़ी फसल को देखकर किसान बेहद परेशान और निराश हैं। कई किसानों के आंसू नहीं थम रहे। उनका कहना है कि अब भूख से मरने की नौबत आ गई है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की गुहार लगाई है।
किसानों का सवाल – "अब क्या करें, कौन देगा नुकसान?"
बर्बाद हुई फसल को देखकर किसान भगवान से लेकर सरकार तक से सवाल कर रहे हैं – "अब क्या होगा हमारा? कौन भरेगा इस नुकसान की भरपाई?" हजारों किसान परिवार इस प्राकृतिक आपदा से उबरने के लिए प्रशासनिक मदद की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
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