जालौन में नहर सफाई के नाम पर बंदरबाँट, अधिशासी अभियंता समेत दो पर संदेह


जालौन। बेतवा प्रखंड द्वितीय में नहर सफाई के नाम पर करोड़ों का भ्रष्टाचार सामने आया है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर भुगतान तक में धांधली के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस पूरे मामले में अधिशासी अभियंता चंद्रपाल सिंह और बाबू जय बिहारी लाल सक्सेना की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
 नहर सफाई की प्रतीकात्मक फोटो
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48% ब्लो टेंडर पर भी गुणवत्ता का दावा

प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, टेंडर प्रक्रिया में 40 से 48% तक ब्लो टेंडर जाने के बाद भी गुणवत्तापूर्ण काम होने का दावा किया जा रहा है। सवाल यह है कि इतनी कम बोली में गुणवत्ता कैसे सुनिश्चित हुई? किसानों का आरोप है कि यह महज खानापूर्ति थी।

जमीन पर काम अधूरा, पैसा पूरा हड़पा

इस घोटाले की सबसे बड़ी विसंगति यह है कि टेंडर, बजट और भुगतान तो पूरा हो गया, लेकिन जमीन पर काम अधूरा है। माधोगढ़, नदीगांव व सिरसाकलार में नहरों की हालत दयनीय है।

नहर ओवरफ्लो से तबाह हुई फसल, किसान परेशान

नहरों के ओवरफ्लो के कारण किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई। किसानों ने आरोप लगाया है कि सिर्फ सड़कों के किनारे झाड़ियां काटकर काम पूरा कर दिया गया। जबकि अंदरूनी नहरों में मलबा और गंदगी पड़ी है। युवा किसान प्रिंस की फसलें ओवरफ्लो से बर्बाद हुईं, लेकिन किसी अधिकारी ने उनकी पीड़ा नहीं सुनी।

31 मार्च से पहले बिना काम पूरा हुए भुगतान

सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि 31 मार्च से पहले बिना काम पूरा किए भुगतान जारी कर दिया गया। यानी ठेकेदारों को पैसा मिल गया, लेकिन नहरों की सफाई नहीं हुई।

सपा जिलाध्यक्ष ने मांगी जांच, एफआईआर और ब्लैकलिस्टिंग

इस भ्रष्टाचार पर अब समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष दीपराज गुर्जर ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच, दोषियों के खिलाफ एफआईआर और संलिप्त फर्मों को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।


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