--विकास खंड महेवा के ग्राम पंचायत रिनियां वेदेपुर का मामला।
उरई(जालौन)। जनपद के विकास खंड महेवा में भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। डीएम राजेश कुमार पाण्डेय की सख्ती के बावजूद अधीनस्थ अधिकारियों के संरक्षण में निधि और मनरेगा योजना में बड़े स्तर पर फर्जी तरह से भुगतान हो रहा हैं। विगत माह महेवा ब्लॉक की दर्जनों ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार की गंभीर शिकायतें हुई। लेकिन जिम्मेदारों ने मोटी रकम लेकर मामले को दबा दिया। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत होती है। सारे सुबूत अधिकारियों को देते हैं। जांच के आदेश होते है,जांच टीम गठित होती है लेकिन उसके बाद मैनेजमेंट का सिस्टम लागू होता है।
ऐसा ही एक मामला महेवा विकास खंड के ग्राम पंचायत रिनिया वेदेपुर का है। जहां पर ग्राम प्रधान राजकुमारी कुशवाहा ने सचिव की मिलीभगत से अपने सगे भतीजे अंशु कुशवाहा की फर्म नैना कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्स को पंचायतीराज नियमावली का उल्लंघन करते हुए सीधा लाभ देते हुए ग्राम निधि से महज एक वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही हैंडपंप मरम्मत,गौशाला मेंटीनेंस,आंगनवाड़ी कारीगर भुगतान,क्रॉसिंग निर्माण,दिव्यांग शौचालय निर्माण,आर आर सी सेंटर निर्माण हेतु सात लाख से अधिक का भुगतान किया है। आश्चर्य की बात यह है कि फर्म मालिक भतीजा अंशु कुशवाहा ग्राम पंचायत में स्थित गौशाला में गौपालक का कार्य भी करता है। प्रधान और सचिव की सांठगांठ से लगातार फर्जी भुगतान को अंजाम दिया जा रहा है। पूर्व में शिकायत हुई लेकिन मामले को दबा दिया गया। वहीं जिम्मेदारों ने कहा कि उन्हें कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। अगर शिकायत आती है तो कड़ी कार्यवाही अमल में लाई जाएगी।
एक बहु और दो भतीजे ले रहे फर्जी कुशल श्रमिक का भुगतान,
प्रधान ने अपनी बहु हेमलता पत्नी अंशु को कारीगरध्मेट दिखाकर लाखों रुपए का कुशल श्रमिक भुगतान दिया गया है। साथ ही अन्य दो सगे भतीजे अमित और नीलेश को भी कुशल श्रमिक का लगातार लाखों रुपए का फर्जी भुगतान किया गया है। ब्लाक के कर्मचारियों द्वारा दबी जुबान से स्वीकार किया गया कि कुशल श्रमिक में कुछ लोगों द्वारा संगठित होकर करोड़ों रुपए का घोटाला किया गया है। जिसमें ब्लाक के कई कर्मचारी और तथाकथित ठेकेदार भी सम्मिलित है। जो समय समय पर जनपद के संबंधित अधिकारियों की सेवा पानी करते रहते हैं।
गोपालक भी है भतीजा और ठेकेदार भी
यहाँ ग्राम प्रधान राजकुमारी कुशवाहा ने सचिव की मिलीभगत से अपने सगे भतीजे अंशु कुशवाहा की फर्म ष्नैना कंस्ट्रक्शन एंड सप्लायर्सष् को सीधा लाभ पहुँचाया। पंचायतीराज नियमावली का उल्लंघन करते हुए मात्र एक वित्तीय वर्ष 2025-26 में ग्राम निधि से हैंडपंप मरम्मत,गौशाला मेंटीनेंस,आंगनवाड़ी कारीगर भुगतान,क्रॉसिंग निर्माण,दिव्यांग शौचालय निर्माण,आरआरसी सेंटर निर्माण आदि के नाम पर 7 लाख रुपए से अधिक का भुगतान कर दिया गया।सबसे चैंकाने वाली बात यह है कि फर्म मालिक अंशु कुशवाहा उसी ग्राम पंचायत की गौशाला में गौपालक का कार्य भी करता है। यानी एक ही व्यक्ति को प्रधान चाची द्वारा दोहरा लाभ दिलाया जा रहा है।
ग्रामीणों की पीड़ा- जांच के नाम पर अधिकारी भी करते खेल
ग्रामीणों का आरोप है कि भ्रष्टाचार की शिकायत और पर्याप्त साक्ष्य होने के बाद भी साहब दोषियों से मोटा लिफाफा लेकर शिकायत दबा देते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत होती है सभी सबूत अधिकारियों को दिए जाते हैं जांच के आदेश होते हैं, टीम बनती है उसके बाद मैनेजमेंट का सिस्टम लागू होता है और मामला दब जाता है यह मामला ग्रामीण भ्रष्टाचार, पारिवारिक ठेकेदारी, फर्जी भुगतान और अधिकारियों की मिलीभगत का जीता-जागता उदाहरण है। इस पर डीएम और शासन स्तर पर स्वतः संज्ञान लेकर सख्त जांच की आवश्यकता है।
फोटो परिचय-भुगतान की स्क्रीनशाट्
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