उरई में मजदूर-किसानों का जोरदार प्रदर्शन, चार श्रम कोड वापसी समेत 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा


उरई(जालौन)।  ऑल इंडिया सेंट्रल कौंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस के बैनर तले मजदूरों और किसानों ने मंगलवार को शहर में भव्य प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने पहले बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, फिर श्चार श्रम कोड वापस लोश्, श्मनरेगा में 200 दिन काम दो, 600 रुपये मजदूरी दोश्, श्यूजीसी एक्ट बहाल करोश्, श्निजीकरण खत्म करोश् और श्जातिगत समानता की गारंटी करोश् जैसे नारों से सड़कों को गूंजायमान कर दिया।

  मामू की मजार से शुरू जुलूस जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचा, जहां यह सभा में बदल गया। वक्ताओं ने केंद्र सरकार पर फासीवादी तानाशाही, संविधान और लोकतंत्र पर हमले का आरोप लगाया।
एआईसीसीटीयू राष्ट्रीय पार्षद कॉमरेड राम सिंह चौधरी ने कहा, ष्चार श्रम कोड के जरिए मजदूरों का हड़ताल, यूनियन और सुरक्षा का अधिकार छीनकर उन्हें गुलाम बनाया जा रहा है। पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट देकर देश को कंपनी राज में बदला जा रहा है। 44 श्रम कानून बहाल करने होंगे।अखिल भारतीय किसान महासभा के राज्य सचिव कॉमरेड राजीव कुशवाहा ने अमेरिकी व्यापार समझौते को किसानों के लिए अभिशाप बताया। उन्होंने कहा, ष्इसके चलते किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। जल, जंगल और जमीन लूटी जा रही है। संविधान और लोकतंत्र पर चल रहा बुलडोजर रोकना जरूरी है।
   वक्ताओं ने यूजीसी 2026 को 1956 की तर्ज पर बहाल करने, शिक्षा के निजीकरण पर रोक, जातिगत भेदभाव खत्म करने और संवैधानिक संस्थाओं पर हमले रोकने की मांग की। प्रदर्शन के बाद जिलाधिकारी को 13 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया, जिसे राष्ट्रपति को भेजा जाएगा। इस मौके पर सीपीआई नेता गिरेंद्र सिंह, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता कमलाकांत वर्मा, नौजवान सभा के विनय पाठक, सुरेश मिस्त्री, राजाराम वर्मा, काशीराम वर्मा सहित दर्जनों संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
फोटो परिचय- ज्ञापन देते मजदूर किसान

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