(संजय शर्मा)
उरई(जालौन)। इंसान की भावनाएं और संवेदनाएं ही उसे इंसान की श्रेणी में खड़ा करती हैं। हिंदी फिल्म का एक गीत खुद के लिए जिए तो क्या जिए यह जिंदगी तो है। जमाने के लिए कहने को यह मन को अच्छा लगने वाला और मनोरंजन तक ही सीमित रह सकता है पर यहां कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपने किरदार से इन गीतों की सार्थकता को चरितार्थ कर देते हैं यहां नगर के आचार्य नरेंद्र देव इंटर कॉलेज के प्रवक्ता ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है जो आम और खास सभी के लिए प्रेरणा स्रोत बन गया है। नौ वर्ष के मासूम को ऑपरेशन के दौरान समय पर अपना रक्त देने वाले पांडे जी ने न सिर्फ उसे मासूम को नया जीवन दिया है बल्कि यह भी साबित कर दिया कि मानवता के रिश्ते की अपनी एक अलग कशिश होती है।
बताते चलें कि गत दिवस यहां नगर की राजकीय मेडिकल कॉलेज में एक 9 वर्षीय मासूम दिव्यांश पुत्र मुकेश निवासी करमेर के गले के ट्यूमर के ऑपरेशन के लिए भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों को जब ऑपरेशन के दौरान उस मासूम के ब्लड ग्रुप से जुड़े रक्त की जरूरत पड़ी तो उन्होंने उस बच्चों के परिजनों को जानकारी दी। परिजनों के माध्यम से यह बात ब्लड डोनेट करने वाले कुछ लोगों को पता चली और उड़ते-उड़ते यह बात आचार्य नरेंद्र इंटर कॉलेज के प्रवक्ता शुवेन्द्र कुमार पांडेय तक पहुंची बताया जाता है कि उनका ब्लड ग्रुप भी वही था और वह बिना किसी देरी लगाएं राजकीय मेडिकल कॉलेज पहुंच गए और उन्होंने अपना रक्त देकर सामाजिक दायित्व निभाया यही नहीं वह स्वयं भी एहसास करते हैं कि उसे बच्चों से भले ही उनका कोई सामाजिक रिश्ता ना रहा हो पर रक्त देने के बाद वह महसूस करते हैं कि अब वह उनका अपने सगे रिश्तों जैसा एहसास कराता है फिलहाल जो भी हो लेकिन इतना साफ है कि जिस तरह से प्रवक्ता श्री पांडे ने मासूम बच्चे की जिंदगी बचाने में अपना रक्त देकर जो सामाजिक दायित्व निभाया है। वह समाज के लिए काम प्रेरणादायक नहीं है और यह सच भी है कि मानवता से बड़ा कोई दूसरा रिश्ता नहीं होता।
फोटो परिचय- मासूम को ब्लड डोनेट करते एएनडी के प्रवक्ता
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