कदौरा(जालौन)। इस्लाम के प्रमुख विद्वान मौलाना मुहम्मद इक़रार अहमद क़ादरी बरकाती समदी बागी ने कहा है कि अल्लाह के नेक बंदे (औलिया) हर दौर में इंसानियत की रहनुमाई करते हैं। उनके फैज और बरकात से आज भी लाखों लोग मुस्तफीद हो रहे हैं। औलिया-ए-किराम का वजूद इस्लाम की हक़ानियत और रूहानी अजमत की रोशन दलील है।
मौलाना ने बताया कि इस्लाम में औलिया का सालाना उर्स मनाया जाता है, जो अल्लाह से उनकी मुलाकात की याद दिलाता है। इस अवसर पर उनकी शिक्षाओं, खिदमात और इंसानियत के लिए किए गए कार्यों को याद किया जाता है। उन्होंने कहा कि वली अल्लाह का दोस्त होता है, जो नेक, परहेज़गार और इल्म व मारिफत से मालामाल होता है। जहालत और विलायत एक साथ नहीं रह सकती। औलिया इल्म हासिल करने पर जोर देते हैं, जो जिंदगी को रोशन और कामयाब बनाता है।
मौलाना इक़रार ने कहा कि औलिया के दरबार में हर मजहब और तबके के लोग अपनी हाजतें लेकर हाजिर होते हैं। मुस्लिम, हिंदू, सिख, ईसाई सभी यहां दुआ करते हैं। अल्लाह अपने नेक बंदों के सदक़े उनकी दुआएं कुबूल फरमाता है। इन दरबारों से मोहब्बत, भाईचारे और अमन का संदेश मिलता है, जिससे नफरत और भेदभाव खत्म होता है।
उन्होंने बागी शरीफ के सूफी संत पहाड़ी शहीद बाबा रहमतुल्लाह का जिक्र करते हुए कहा कि उनका दरबार सदियों से शांति और इंसानियत का केंद्र है। लोग यहां बीमारियों, परेशानियों और कारोबार की बरकत के लिए दुआ करते हैं। अल्लाह उनके सदक़े मायूस दिलों को उम्मीद और सुकून अता करता है। ये दरबार पूरी दुनिया को भलाई और इंसानी एकता का पैगाम देते हैं।
फोटो परिचय- मौलाना इकरार अहमद कादरी
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