पंचायती राज के मंदिर में लूट का खेल, ग्राम पंचायत कुकहनू में प्रधान-सचिव की सांठगांठ से उड़े लाखों


उरई(जालौन)। जनपद जालौन के महेवा विकास खंड में पंचायतीराज अधिनियम की धज्जियां उड़ती देख ग्रामीणों का खून खौल उठा है। शासन के साफ-साफ निर्देशों को ताक पर रखते हुए ग्राम प्रधान अपने और अपने परिजनों के खातों में मनमाने ढंग से मजदूरी का भुगतान करा रहे हैं। मामले में ग्राम पंचायत सचिवों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की आग और भी भड़क उठी है। यह सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल है।

ग्राम निधि लूट का हथियार’, प्रधान के खाते में लाखों का अवैध भुगतान

महेवा ब्लॉक के ग्राम पंचायत कुकहनू का मामला तो सबसे चौंकाने वाला है। यहां ग्राम प्रधान शशि और ग्राम सचिव की कथित सांठगांठ से ग्राम निधि से फर्जी भुगतान का अम्बार लगा दिया गया। प्रधान के खाते में नाली निर्माण, विज्ञापन, सफाई कार्य, आरआरसी सेंटर निर्माण, गौशाला में तार फिटिंग, चरनी निर्माण और गौपालक मानदेय के नाम पर लाखों रुपए डाले गए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधान ने ग्राम निधि को लूट का हथियार बना रखा है। विरोध करने वालों को धमकी देकर चुप कराया जाता है। प्रशासन से अब सख्त कार्रवाई की पुकार लगातार बुलंद हो रही है।

गौपालक का मानदेय भी हजम, प्रधान ने किया बंदरबांट
ग्रामीणों के मुताबिक, प्रधान शशि ने गौपालक के मानदेय की धनराशि भी अपने खाते में डाल ली। सिर्फ इतना ही नहीं, प्रधान प्रतिनिधि ने शासकीय धन का जमकर बंदरबांट किया। वर्ष 2022-23 में गौशाला मानदेय के 12,000 और वर्ष 2023-24 में केयरटेकर के नाम पर 24,000 प्रधान ने अपने खाते में डलवा लिए। सचिव द्वारका प्रसाद गुप्ता से सांठगांठ कर रकम उड़ाई गई। जूनियर हाईस्कूल परिसर में मिट्टी भराई के नाम पर 52,000 खर्च हुए, जबकि मिट्टी नाम मात्र की डाली गई। इसके अलावा तिरपाल, टट्टर, नाली निर्माण, पंचायत घर में टाइल्स, सीसी निर्माण, गौशाला सफाई, शौचालय निर्माण और हैंडपंप मरम्मत के नाम पर लाखों का भुगतान प्रधान व उसके परिजनों के खाते में कराया गया।

ग्रामीणों के भरोसे पर खरे नही उतर रहे जिम्मेदार
जब इस मामले में विभागीय अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने रटा-रटाया जवाब दिया- “ब्लॉक स्तर पर निगरानी के लिए अधिकारी लगाए गए हैं।” मगर ग्रामीणों का आरोप है कि थोड़े से पैसों के लालच में ये जिम्मेदार अधिकारी आँखें मूँदे बैठे हैं, जिससे विकास कार्यों की धनराशि का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा है। हालांकि, एक अधिकारी ने कहा, ष्मामले की जाँच कराकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।ष् लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब तक तो सिर्फ ढकोसले भरे जवाब ही मिले हैं।


भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त संदेश से मिलेगा हर प्रधान और सचिव को सबक
यह सिर्फ कुकहनू की कहानी नहीं है, बल्कि पूरे जिले के पंचायती राज ढांचे पर एक गंभीर चोट है। प्रधान-सचिव की मिलीभगत से ग्रामीणों के पसीने की कमाई को लूटा जाना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने अब भी सख्त रुख नहीं अपनाया, तो यह किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों के साथ बड़ा अन्याय होगा। जांच कराएं, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करें और प्रधान से लेकर सचिव तक की मिलीभगत को जड़ से खत्म करें।  यही ग्रामीणों की एकमात्र मांग है। यह मामला हर उस प्रधान और सचिव के लिए कड़ा सबक है,जो शासन की नींव को ही कमजोर कर रहे हैं। अब देर नहीं, सख्ती होनी चाहिए।
फोटो परिचय- भुगतान का स्क्रीन सोट्

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