अल्लाह की रजा के लिए हजरत इब्राहीम ने दी लखते जिगर की कुर्बानी


0दर्जन भर से अधिक मस्जिदों में होंगी ईदुल अजहा की नमाज 
उरई(जालौन)। ईदुल अजहा बकरीद का त्यौहार 28 मई दिन गुरुवार को मनाया जायेगा। इस त्यौहार में तीन दिनों तक हजरत इब्राहीम अलै. के द्वारा खुदा की रजा के लिए तमाम कुर्बानियां पेश करने के बाद भी जब ख्वाब में अल्लाह ने अपनी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी पेश करने को कहा तो उन्होने अपने लखते जिगर बेटे हजरत इस्माइल अलै. की कुर्बानी पेश की। छुरी इस्माइल पर चलाई लेकिन अल्लाह के हुक्म अनुसार फरिश्तों ने इस्माइल को हटाकर, और दुम्बा लिटा दिया जिस पर छुरी चली। 
अल्लाह ने इब्राहीम अलै. की कुर्बानी को कुबूल किया, और दुनिया के तमाम मुसलमानों को इस पर अमल करने की अनुमति प्रदान की, कुर्बानी साहिबे निसाब पर फर्ज की। तभी से तीन दिनों तक भैंसा, बकरा, भेड़ आदि की कुर्बानियों का सिलसिला हजारों सालो से जारी है। काजी-ए-शहर शकील बेग रहमानी ने बताया कि बकरीद को अल्लाह ने साहिबे निसाब पर कुर्बानी फर्ज की। अल्लाह ने कर्जदार पर कुर्बानी का हुक्म नहीं दिया है। कहा कि यह अल्लाह का बड़ा करम है कि उसने दुम्बे को इब्राहीम अलै. के सामने लिटाकर कुर्बानी कुबूल की। यदि वह अपने बेटे इस्माइल पर छुरी चलाते दुम्बे की जगह बेटे को कुर्बान कर देते तो मुसलमान को अपनी औलादों की कुर्बानी पेश करना होती। कहा कि अल्लाह की राह में हर साहिबे निसाब कुर्बानी जरूर पेश करे। बताया कि इस्लाम का साल कुर्बानी से शुरू होता है और साल का आखिरी माह भी कुर्बानी से खत्म होता है। बताया कि बकरीद इस्लामी कैलेंडर का आखिरी माह है। जबकि इसके बाद इस्लामी साल की शुरूआत मोहर्रम से होती है। मोहर्रम में हुए कर्बला को दुनिया जानती है। पैगंबर मोहम्मद साहब के नवासे इमाम हुसैन और उनके एहले खानदान ने नबी की उम्मत तथा हक और इस्लाम के लिए ही नही सरियत के लिए अपनी शहादत दी।
फोटो परिचय-जानकारी देते काजी-ए-शहर

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