*स्नेहलता रायपुरिया की रिपोर्ट*
भोपाल(मध्यप्रदेश)। भोपाल शहर की प्रतिष्ठित मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी की ग्रंथपाल रत्ना वाधवानी एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली और रचनात्मक प्रतिभा के चलते सुर्खियों में हैं। साहित्य, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहने वाली रत्ना वाधवानी को इस बार एक विशेष उपलब्धि हासिल हुई है, जिसने उनके व्यक्तित्व को और भी गौरवान्वित किया है।
विचारक्रांति साहित्य सेवा संस्थान द्वारा आयोजित विचारक्रांति चित्र लेखन प्रतियोगिता में उन्होंने अपनी सराहनीय सहभागिता और प्रभावशाली लेखन दृष्टि का परिचय देते हुए सम्मान पत्र प्राप्त किया। यह प्रतियोगिता रचनात्मकता, सामाजिक चेतना और साहित्यिक अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी, जिसमें प्रदेशभर के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
रत्ना वाधवानी ने अपने लेखन के माध्यम से समाज के महत्वपूर्ण विषयों—विशेषकर पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों—को बेहद संवेदनशील और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके लेखन में विचारों की गहराई और समाज के प्रति जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से झलकती है, जिसके कारण उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
संस्थान की ओर से सम्मान पत्र प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। आयोजकों ने कहा कि रत्ना वाधवानी की लेखनी समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती है और आने वाले समय में भी वह अपनी रचनाओं के माध्यम से जनमानस को जागरूक करती रहेंगी।उल्लेखनीय है कि रत्ना वाधवानी केवल एक ग्रंथपाल ही नहीं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक चिंतक भी हैं। वह समय-समय पर विभिन्न सामाजिक अभियानों, पुस्तक पठन प्रोत्साहन कार्यक्रमों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों में भी बढ़-चढ़कर भाग लेती रही हैं।उनकी इस उपलब्धि से न केवल पुस्तकालय परिवार बल्कि पूरे भोपाल शहर में हर्ष का माहौल है। साहित्य और समाज के क्षेत्र में उनका यह योगदान निश्चित ही अन्य लोगों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।
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