उरई(जालौन)। एट थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी पिता ने थाना पुलिस को दी तहरीर में बताया था कि वह बाबा है और विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए आते-जाते रहते हैं। वह एक-दो महीने में घर पहुंच पाते थे। उनकी पत्नी मानसिक रूप से कमजोर है और घर पर उनकी 15 वर्षीय पुत्री मां के साथ रहती थी।
आरोप है कि पड़ोस में रहने वाले भूपेंद्र सिंह ने किशोरी के साथ कई बार दुष्कर्म किया। विरोध करने पर वह जान से मारने की धमकी देता था। वर्ष 2018 में किशोरी के पेट में दर्द होने पर उसे स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां 18 मार्च 2018 को उसने बच्चे को जन्म दिया।
इसके बाद पुलिस ने पीड़ित पिता की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म तथा एससी-एसटी एक्ट सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। पीड़िता ने अपने बयान में भी आरोपी द्वारा कई बार दुष्कर्म किए जाने की पुष्टि की थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था तथा 19 मई 2018 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
करीब आठ वर्ष तक चली सुनवाई के बाद बुधवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट राजीव सिंह ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी भूपेंद्र सिंह को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। साथ ही तीन लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
न्यायालय ने आदेश दिया कि जुर्माने की 80 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में दी जाएगी। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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