-प्रधान-सचिव की मिलीभगत से फर्स्ट खाते से उड़ाए जा रहे लाखों रुपये, डीएम ने जांच के दिए आदेश
उरई(जालौन)। जनपद जालौन के विकासखंड महेवा की ग्राम पंचायतों में सरकारी धन की खुलेआम लूट ने प्रशासनिक तंत्र को शर्मसार कर दिया है। यह महज वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास की धज्जियाँ उड़ाने वाला एक संगठित खेल है, जिसमें ग्राम प्रधान, सचिव और पदाधिकारी मिलीभगत से ग्रामीणों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं।
पड़ताल में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि नियमों को ताक पर रखकर निजी खातों में अवैध भुगतान किया जा रहा है। विकास कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं, जबकि लाखों की धनराशि हवा में उड़ा दी गई। यह भ्रष्टाचार की वह पराकाष्ठा है, जहाँ पेंशनभोगी ससुर, प्रधान के पुत्र और सगे रिश्तेदारों की फर्में सरकारी खजाने को लूटने का जरिया बन रही हैं।
हथनौरा में ससुर के खाते में धनवर्षा
हथनौरा प्रधान मुन्नी देवी के ससुर (रिटायर सचिव) के खाते में सीसी, इंटरलॉकिंग, पुताई के नाम पर लाखों निकाले गए। सगे रिश्तेदार की फर्म में बिना काम कराए फर्जी भुगतान और पंचायत सहायक का मानदेय तक हड़प लिया गया।
बम्हौरा प्रधान के पुत्र को गौपालक बनाकर घोटाला
बम्हौरा प्रधान सुरेन्द्र सिंह के पुत्र को गौपालक बनाकर हैंडपंप मरम्मत, सफाई जैसे फर्जी कार्यों पर दो वित्तीय वर्षों में ढाई लाख से अधिक का भुगतान।
प्रधान ने अपने ही खाते में फर्जी भुगतान लिया
पिपरौंधा प्रधान कंचन चौहान ने अपने ही खाते में शौचालय, इंटरलॉकिंग और हैंडपंप रीबोर के नाम पर विभिन्न वर्षों में तीन लाख से अधिक की धनराशि का फर्जी भुगतान लिया।
पुत्र शिवेंद्र सिंह के खाते में अवैध राशि ट्रांसफर
लौना प्रधान के पुत्र शिवेंद्र सिंह के खाते में तीन वित्तीय वर्षों में दस लाख से अधिक की अवैध राशि ट्रांसफर। हाथों से लिखे बिलों पर कुर्सी-मेज से लेकर लाइट फिटिंग तक के नाम पर मनमानी।
अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही पर सवाल
यह लूट तभी संभव है, जब जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर मूकदर्शक बने रहें। बिना कार्य कराए भुगतान, हाथों से लिखे बिल और रिश्तेदारों की फर्मों में धन हस्तांतरण जैसी गंभीर अनियमितताओं पर क्यों नहीं हुई कोई कार्रवाई? क्या यह महज लापरवाही है या फिर भ्रष्ट अधिकारियों और पदाधिकारियों का गठजोड़? यह चुप्पी साफ तौर पर सरकारी धन के दुरुपयोग को बढ़ावा दे रही है।
डीएम के निर्देशों को नजरअंदाज क्यों कर रहे जिम्मेदार
हालांकि, जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच टीम का गठन कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही होगी।लेकिन सवाल यह है कि क्या यह जांच केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रहेगी? यदि पिछली लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर भी गाज नहीं गिरी, तो ग्राम निधि की यह लूट इसी तरह जारी रहेगी। आम जनता की आंखों के सामने विकास कार्य हवा में उड़ते रहेंगे और सिर्फ रिपोर्टें दफ्तरों में कैद होती रहेंगी। अब प्रशासन को शब्दों से हटकर सख्त से सख्त कार्रवाई कर ही दिखानी होगी।
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