0भ्रष्टाचार पर चोट: मनरेगा में खेल, जांच के बाद होगी कार्रवाई
स्वतंत्र घोष ब्यूरो
उरई,(जालौन)। विकास खंड महेवा इन दिनों मनरेगा योजना और ग्राम निधि के फर्जी भुगतान के मामलों में जिस तरह सुर्खियों में है, वह पंचायती राज व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह है। ताजा मामला ग्राम पंचायत लौना के सचिव, प्रधान और रोजगार सेवक की जुगलबंदी का सामने आया है। जिसने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं।
दरअसल, लौना ग्राम पंचायत के सचिव राहुल पहाड़ियां, प्रधान उर्मिला चौहान और रोजगार सेवक ने मिलकर बम्होरी ग्राम पंचायत के मजरा सेम में खेतों पर मेड़बंधी का फर्जी कार्य दिखाकर लाखों रुपये का गबन किया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 व 2024-25 में मुन्नी देवी, राम अवतार, चंद्रमोहन सहित अन्य के खेतों पर पांच मेड़बंधी दिखाकर करीब 10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि असलियत में यह कार्य कभी हुआ ही नहीं।
उरई,(जालौन)। विकास खंड महेवा इन दिनों मनरेगा योजना और ग्राम निधि के फर्जी भुगतान के मामलों में जिस तरह सुर्खियों में है, वह पंचायती राज व्यवस्था पर एक गंभीर प्रश्नचिन्ह है। ताजा मामला ग्राम पंचायत लौना के सचिव, प्रधान और रोजगार सेवक की जुगलबंदी का सामने आया है। जिसने भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दी हैं।
दरअसल, लौना ग्राम पंचायत के सचिव राहुल पहाड़ियां, प्रधान उर्मिला चौहान और रोजगार सेवक ने मिलकर बम्होरी ग्राम पंचायत के मजरा सेम में खेतों पर मेड़बंधी का फर्जी कार्य दिखाकर लाखों रुपये का गबन किया है। वित्तीय वर्ष 2023-24 व 2024-25 में मुन्नी देवी, राम अवतार, चंद्रमोहन सहित अन्य के खेतों पर पांच मेड़बंधी दिखाकर करीब 10 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया, जबकि असलियत में यह कार्य कभी हुआ ही नहीं।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस समय इन भुगतानों को स्वीकृत किया गया, उस समय खेतों में फसल खड़ी थी। ऐसे में मेड़बंदी का कार्य होना संभव ही नहीं था। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के श्रमिक रोजगार के लिए दूसरे राज्यों को जाने को मजबूर हैं, जबकि यहां योजना के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति और पैसे की लूट हो रही है।
बाहरी जॉब कार्ड धारकों को पैसा, ग्रामीण हैरान
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिन जॉब कार्डों में मजदूरी डाली गई, उनमें से अधिकतर धारकों को ग्रामीण पहचानते तक नहीं हैं। कई जॉब कार्ड तो उरई, कालपी व अन्य स्थानों के निवासियों के हैं, जिनका न तो लौना से कोई लेना-देना है और न ही बम्होरी से।
ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा
ग्रामीणों का आरोप है कि सचिव राहुल पहारियां के पास दर्जनों गांवों का चार्ज है और वह अपने निजी ठेकेदारों व फर्मों के माध्यम से फर्जी भुगतान लगवाकर धनराशि हड़प रहे हैं। पूर्व सचिव सुरेशचंद निषाद पर भी पहले कई फर्जी भुगतान के आरोप लग चुके हैं।
प्रशासन हरकत में, जांच के बाद होगी कार्रवाई
इन गंभीर आरोपों के बाद जिला स्तरीय अधिकारी हरकत में आ गए हैं। जिम्मेदार अधिकारियों ने कहा है कि मामले की गहन जांच की जा रही है। दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब देखना यह होगा कि क्या यह जांच सिर्फ कागजी कार्रवाई तक सीमित रहती है, या भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजा जाता है।
फोटो परिचय-फर्जी भुगतान के बाउचर का स्क्रीन सोट
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