-गैस एजेंसी में ग्राहकों का उमडता सैलाब, ओ टी पीआने पर भी मायूस होकर लौट जाते घर
-45 दिन में सिलेंडर मिलने का दावा हवा हवाई स्पष्ट जवाब देने वाला कोई नहीं
(नारायण तिवारी)
कुठौद(जालौन)। घरेलू गैस की किल्लत और कागजी प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बन गई है। गैस एजेंसियों पर केवाईसी करवाने नाम पर सौ रुपए से लेकर दोसौ रुपए उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे हैं।
इसके बाद हेल्पलाइन नंबर पर मिस्ड कॉल करने के बाद भी हफ्तों से ओ टी पी न आने के कारण घरों के चूल्हे प्रभावित हो चुके हैं। जिसकी ओ टीपीआतीभी उसको सिलेंडर नहीं मिलता हैं।इस तरह की कार्य शैली को देखकर ऐसा लगता है कि
जिम्मेदारों द्वारा जन समस्या से जुड़ी इस समस्या के समाधान हेतु अभी तक कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं ।हां इतना जरूर हो गया है ऊंचे दामों पर गैस सिलेंडर बेचकर होटल और रेस्टोरेंटों पर गैस सिलेंडर के द्वारा कहीं कहीं पकवान बनते जरूर देखे जा रहे है। वहीं गरीब लोग एजेंसियों के चक्कर लगा लगाकर मनहार कर चुपचाप बैठकर सरकार को कोस रहा है,। घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति न होने के कारण उपभोक्ताओं में सरकार तथा गैस एजेंसियों के प्रति रोष व्याप्त होता जा रहा है। वैसे देशभर में घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी के कारण आम जनता परेशान है। कई घरों में उपला और लकड़ी के सहारे भोजन बनाने में समस्या उत्पन्न हो रही है ।गैस सिलेंडर पाने के लिए उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है ।कई कई दिनों तक मोबाइल में मैसेज न आने के कारण 45 दिन की समय सीमा भी अब 70 दिन के आसपास पहुंच गई है ।दावे और हकीकत में धरती आसमान का स्पष्ट रूप से अंतर देखा जा रहा है। रसोई गैस की आपूर्ति न होने के कारण नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है ।गैस एजेंसी संचालकों की लापरवाही उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है ।वहीं ब्लैक में सिलेंडर मिलने का धंधा जोरों पर है। उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं के साथ भी बड़े स्तर पर ना इंसाफी की गई है। बहुत से ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्हें केवल नाम मात्र का ही सिलेंडर मिला है ।शेष पूरा खेल होता नजर आ रहा है। हल घरेलू गैस की कीमत के कारण हम जनमानस पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। उपभोक्ताओं का रोज कभी भी आक्रामक हो सकता है।
फोटो परिचय-घरेलू गैस सिलेंडर संकट
कुठौद(जालौन)। घरेलू गैस की किल्लत और कागजी प्रक्रिया उपभोक्ताओं के लिए मुसीबत बन गई है। गैस एजेंसियों पर केवाईसी करवाने नाम पर सौ रुपए से लेकर दोसौ रुपए उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे हैं।
इसके बाद हेल्पलाइन नंबर पर मिस्ड कॉल करने के बाद भी हफ्तों से ओ टी पी न आने के कारण घरों के चूल्हे प्रभावित हो चुके हैं। जिसकी ओ टीपीआतीभी उसको सिलेंडर नहीं मिलता हैं।इस तरह की कार्य शैली को देखकर ऐसा लगता है कि
जिम्मेदारों द्वारा जन समस्या से जुड़ी इस समस्या के समाधान हेतु अभी तक कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं ।हां इतना जरूर हो गया है ऊंचे दामों पर गैस सिलेंडर बेचकर होटल और रेस्टोरेंटों पर गैस सिलेंडर के द्वारा कहीं कहीं पकवान बनते जरूर देखे जा रहे है। वहीं गरीब लोग एजेंसियों के चक्कर लगा लगाकर मनहार कर चुपचाप बैठकर सरकार को कोस रहा है,। घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति न होने के कारण उपभोक्ताओं में सरकार तथा गैस एजेंसियों के प्रति रोष व्याप्त होता जा रहा है। वैसे देशभर में घरेलू गैस की आपूर्ति में कमी के कारण आम जनता परेशान है। कई घरों में उपला और लकड़ी के सहारे भोजन बनाने में समस्या उत्पन्न हो रही है ।गैस सिलेंडर पाने के लिए उपभोक्ताओं को घंटों लाइन में खड़े रहना पड़ रहा है ।कई कई दिनों तक मोबाइल में मैसेज न आने के कारण 45 दिन की समय सीमा भी अब 70 दिन के आसपास पहुंच गई है ।दावे और हकीकत में धरती आसमान का स्पष्ट रूप से अंतर देखा जा रहा है। रसोई गैस की आपूर्ति न होने के कारण नागरिकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच चुका है ।गैस एजेंसी संचालकों की लापरवाही उपभोक्ताओं पर भारी पड़ रही है ।वहीं ब्लैक में सिलेंडर मिलने का धंधा जोरों पर है। उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं के साथ भी बड़े स्तर पर ना इंसाफी की गई है। बहुत से ऐसे उपभोक्ता हैं जिन्हें केवल नाम मात्र का ही सिलेंडर मिला है ।शेष पूरा खेल होता नजर आ रहा है। हल घरेलू गैस की कीमत के कारण हम जनमानस पूरी तरह से प्रभावित हो चुका है। उपभोक्ताओं का रोज कभी भी आक्रामक हो सकता है।
फोटो परिचय-घरेलू गैस सिलेंडर संकट
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