भक्तों ने अष्टमी पर देवी मन्दिरों पर चढाये गए मन्नतों के जवारे

(अरविंद दुबे) 
कोंच(जालौन)। चैत्र नवरात्रि की अष्ठमी को माता गौरी का स्वरूप माना जाता है जिनके पूजन अर्चन से भक्तों को अखण्ड शिव भक्ती के मार्ग पर ले जाते हुए दुष्टों का संहार कर भक्तों का कल्याण करती है और धन धान्य सुख समृद्धि से परिपूर्ण करती है इसी आशा और विश्वास के साथ सनातनी अनुयायियों ने दिन गुरुबार को नगर के समीपस्थ स्थित प्राचीन माँ हुल्का देवी मंदिर व धनुतालाब स्थित काली माता मंदिर आदि पर मन्नतों के जबारे चढाये गए जिसमें आस्था के साथ माता के स्वरूप का स्मरण करते हुए जबारों का पूजन अर्चन किया गया।
 इसके उपरांत झांकी निकालकर भजन पूजन करते हुए जबारों को मंदिरों तक ले जाया गया जहां पर अनुष्ठान के तहत माता को जबारे चढाये गए यह क्रम सुवह से ही देर शाम तक चलता रहा और लगातार दर्शनार्थियों का तांता लगा रहा वहीं व्यबसायिक दृष्टिकोण से दुकानदार भी मन्दिरों के बाहर अपनी अपनी दुकानें सजाए हुए बैठे जिनमें प्रसाद एवं वच्चों के खिलौने आदि की खूब बिक्री हुई।
फोटो परिचय- मंदिरों में जवारे चढ़ाने जाते भक्तगण

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