-पहली रात सूफियाना कलाम से गुलज़ार, देर रात तक जुटे रहे जायरीन
कालपी (जालौन)। नगर के सदर बाजार स्थित दरगाह हज़रत शेख अलाउद्दीन कुरैशी उर्फ भोले सालार का 156वां सालाना उर्स अकीदत और परंपरागत रिवायतों के साथ शुरू हो गया। उर्स के आगाज़ पर क्षेत्र ही नहीं बल्कि दूर-दराज़ जनपदों से पहुंचे जायरीन ने दरगाह पर चादरपोशी कर मुल्क में अमन-चौन, तरक्की और खुशहाली की दुआएं मांगीं।
उर्स की पहली रात दरगाह परिसर में महफ़िल-ए-कव्वाली का आयोजन किया गया, जहां रात 10 बजे से सूफियाना कलाम की गूंज सुनाई देने लगी। कानपुर से आए मशहूर कव्वाल कमर वारसी ने अपने अंदाज़-ए-बयां से समा बांध दिया। उनके बाद राजस्थान से पधारे शब्बीर सदाकत साबरी ने नात, मनकबत और ग़ज़लों की प्रस्तुति देकर महफ़िल को रूहानी रंग में रंग दिया। देर रात तक अकीदतमंद झूमते रहे और “हाज़िरी” लगाकर दुआ में शामिल होते रहे। उर्स के मद्देनज़र दरगाह परिसर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं, वहीं साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है ताकि जायरीन को किसी प्रकार की असुविधा न हो। उर्स के आगामी कार्यक्रमों को लेकर अकीदतमंदों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। आयोजकों ने बताया कि पारंपरिक रस्मों के साथ आगामी दिनों में भी धार्मिक आयोजन जारी रहेंगे।
फोटो परिचय- महफ़िल-ए-कव्वाली के दौरान मौजूद अकीदतमंदों की भीड़।
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