महिला सशक्तिकरण की प्रतीक त्याग, समर्पण की प्रतिमूर्ति थी, माता रमाबाई अम्बेडकर- रामशरण जाटव


उरई(जालौन)। जाटव समाज विकास महासमा उ०प्र० की कोर समिति की बैठक का आयोजन माता रमाबाई अम्बेडकर की जयंती पर किया गया। बैठक में महासभा के प्रदेश अध्यक्ष रामशरण जाटव ने कहा कि माता रमाबाई अम्बेडकर महिला सशक्तीकरण की प्रतीक, त्याग, समर्पण की प्रतिमूर्ति थीं। माता रमाबाई का जन्म महाराष्ट्र के गाव बनाद में 7 फरवरी 1998 में हुआ था उनकी शादी बाबा साहिब से 1906 में हुई थी तथा परिनिर्वाण 27 मई 1935 में दादर में हुआ,।

 इस दौरान उन्होंने बाबा साहेब अम्बेडकर के संघर्ष के समय जब वह इस दबे कुचले समाज के लिए लड़ रहे थे, पूरा सहयोग किया। उन्होंने अपने चार बच्चों की कुर्वानी देते हुए अपना जीवन न्योछावर किया,। हमारी माता बहनों को उनके जीवन से प्रेरणा लेना चाहिए। बैठक का आयोजन महासभा के वरिष्ठ सदस्य राधेश्याम जाटव (भदेवरा) के आवास पर हुआ, कार्यकम का संचालन करते हुए महासभा के महामंत्री जगदेव प्रसाद ने कहा कि माता रमाबाई का जीवन बहुजन समाज के लिए प्रेरणादायक रहा। पूर्व स्पेशल मजि० एडवोकेट सी०वी० सिंह ने भी महासभा की स्थापना के बारे में गहनता चर्चा की, पूर्व प्रधानाचार्य रामनाथ सुमन इ० मनमोहन सिंह ने जिला संगठन को गतिशील मजबूत बनाये जाने पर बल दिया।

 जिलाध्यक्ष माताचरण जाटव ने सक्रियता से संगठन को गतिशील बनाये जाने का आश्वासन दिया। बैठक में मुख्य रूप से पूर्व जिलाध्यक्ष बलराम बाबू, डा० सत्येन्द्र कल्याणी एड०, विश्वदीप राव, शिक्षक,लाखन सिंह,बौद्ध उपासक बद्रीप्रसाद, पूर्व कानूनगो मुन्नालाल जाटव, देवकीनन्दन, नगर अध्यक्ष शारदा प्रसाद जाटव, पूर्व प्रधानाचार्य कालका प्रसाद, विजय कुमार जाटव ने सभी ने माता रमाबाई के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित किये।अन्त में महासभा के मीडिया प्रभारी राजेश जाटव ने माता रमाबाई के जीवन के बारे में विस्तृत चर्चा करते आधुनिक भारत की राष्ट्र माता को शत् शत् नमन करते श्रद्धासुमन अर्पित किये।
फोटो परिचय- राष्ट्रमाता रमाबाई को श्रद्धासुमन अर्पित रामशरण जाटव व अन्य

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