उरई(जालौन)। ‘अगर मुझसे जाने-अनजाने में कोई गुस्ताखी हो गई हो, मैंने आपका दिल दुखाया हो तो मुझे माफ कर दीजिएगा।’ शब-ए-बरात पर अल्लाह को राजी करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने वाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम पर कुछ इसी तरह के मैसेज पोस्ट किए। पूरी रात मुसलमानों ने इबादत कर गुनाहों से माफी मांगी। शब-ए-बरात पर मान्यता है कि अल्लाह ने साल में कौन जिंदा रहेगा, कौन मरेगा, किसके कारोबार में बरकत होगी, किसे नुकसान होगा जैसे तमाम बिंदुओं की इंट्री करने के बाद रजिस्टर बंद कर दिया। अल्लाह ने इस रात बंदों को आवाज लगाई कि है कोई जो मुझसे माफी का तलबगार हो। है कोई जो मेरे सामने संकल्प ले कि अब गुनाहों से दूर रहेगा, कभी गुनाह नहीं करेगा। इसके चलते प्रेम नगर, श्याम नगर, आजाद नगर, बल्लभ नगर, सूर्य नगर, पटेल नगर, सदनपुरी, मोहनपुरा, तिलक नगर, कृष्णा नगर, गणेशगंज मे शाम को मगरिब की नमाज के बाद से शुरु हुआ इबादत का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। बड़ी संख्या मे लोग करसान रोड स्थित कब्रिस्तान मे फातिहा पढ़ने पहुंचे। कब्रिस्तान में हाजरी के बाद सभी मुसलमान पूरी रात जागे और मस्जिदों में नफली नमाज पढ़कर इबादत की। इस दौरान मुसलमानों ने अल्लाह से अपने गुनाहों की माफी मांगी। मान्यता है कि इस पवित्र रात को अल्लाह अपने चाहने वालों का हिसाब-किताब करने के लिए आते हैं, इसलिए जो भी सच्चे मन से अल्लाह की इबादत करते हैं उनके गुनाहों को माफ कर उनके लिए जन्नत के दरवाजे खोल देते हैं। अल्लाह उन्हें पाक साफ कर देते हैं। यही कारण है कि लोग शब-ए-बारात में रात भर जागकर अल्लाह की इबादत करते हैं और उनसे अपने गुनाहों की माफी मांगते हैं। इस दौरान मस्जिदों व मजारों को भी सजाया जाता है, और घरों मे हलवा, बिरयानी आदि पकवान बनाए जाते हैं और इसे गरीबों में बांटा जाता है।
आज मुस्लिमों ने रखा रोजा
उरई। शब-ए-बरात के अगले दिन रोजा रखने की रवायत है। रातभर की इबादत के बाद मुस्लिमो ने आज बुधबार को रोजा रखा। शाही इमाम फिरोज अली रहमानी के अनुसार शाबान की 15 वीं रात को इबादत में गुजारना चाहिए और दिन में रोजा रखना चाहिए। इस रात खुदा की तरफ से ऐलान होता है कि है कोई तौबा करने वाला जिसकी तौबा मैं कबूल करू? है कोई मगफिरत चाहने वाला जिसकी में मगफिरत करू? अदलाई शब-ए-बरात की रात में अपने बंदो के नामे आमाल लिखता है। साथ ही जो मोमिन बंदे रोजा रखते है। उन्हें अल्लाह पाक बेहिसाब शबाब अता करता है।
इन मस्जिदों में सारी रात होती रही इबादत
उरई। शहर की लगभग सभी मस्जिदों में इशा की नमाज के बाद से सुबह फज्र की नमाज तक लोग इबादत करते रहे। करसान रोड स्थित शाही ईदगाह, नूरानी मस्जिद, नबी की मस्जिद, दादूपुरा जामा मस्जिद बड़ी मस्जिद, जामा मस्जिद बजारिया, कुरैशियान मस्जिद, क्लब की मस्जिद, बघोरा बाली मस्जिद आदि में रात भर तिखावत व नफिल नमाज पढ़ने का सिलसिला चलता रहा।
बलियो के आस्तनों पर रही खूबसूरत सजावट
उरई। शहर में मौजूद बली अल्लाह के आस्तानों को आकर्षक रूप में सजाया गया था। जहां पहुंचकर लोगों ने फातिहा पढ़ी। सैय्यद शफे शाह बाबा, बेरी वाले बाबा, मामू भांजे बाबा, पदम् शाह बाबा, दूल्हा सैय्यद बाबा, बाटिया सैय्यद बाबा, फतेह सैय्यद बाबा काले पहलबान बाबा, कुनिया बाती बाबा, गैबू शाह बाबा, बड़े पीर सरकार आदि आस्तानों पर रात भर अकीदतमंद पहुंचते रहे।
शब-ए-बरात पर एसपी ने स्वयं पैदल गश्त कर परखी सुरक्षा व्यवस्था
उरई। शब-ए-बरात के अवसर पर शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। मंगलवार देर रात एसपी डॉ दुर्गेश कुमार ने भारी पुलिस बल के साथ शहर की कब्रिस्तान व मुख्य मार्गों और मस्जिदों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान संदिग्धों की तलाशी भी ली गई और आमजन को सुरक्षा का भरोसा दिलाया गया।शब-ए-बरात के दौरान मस्जिदों और इबादतगाहों पर अकीदतमंदों की संभावित भीड़ को देखते हुए पुलिस ने पहले ही सुरक्षा योजना तैयार कर ली थी। एसपी डॉ दुर्गेश कुमार ने स्वयं पुलिस बल के साथ पैदल गश्त किया। उन्होंने भीड़भाड़ वाले संवेदनशील इलाकों का दौरा किया, सुरक्षा इंतजामों का निरीक्षण किया और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
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