कालपी(जालौन)। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विधायक विनोद चतुर्वेदी ने अपने विधानसभा क्षेत्र की जर्जर नहरों और यमुना तट पर स्थित प्राचीन घाटों के पुनर्निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सरकार से क्षेत्र के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों के संरक्षण तथा सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की।
सदन में अपने वक्तव्य के दौरान विधायक विनोद चतुर्वेदी ने कहा कि कालपी नगरी का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व प्राचीन काल से रहा है। यमुना तट पर स्थित कई घाट धार्मिक आस्था के केंद्र हैं, लेकिन वर्तमान में उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय है। उन्होंने नर्सिंग टीला, ढोड़ेश्वर मंदिर घाट और पीला घाट जैसे स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं सौंदर्यीकरण के लिए विशेष योजना बनाने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकें और पर्यटन को भी बढ़ावा मिले। विधायक ने यह भी बताया कि 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में कालपी का किला महत्वपूर्ण रणनीतिक केंद्र रहा, जहां वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और अन्य क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के विरुद्ध योजनाएं बनाई थीं। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और विकास के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। सिंचाई व्यवस्था पर बोलते हुए विधायक ने बताया कि अंग्रेजी शासनकाल में निर्मित हमीरपुर शाखा और कुठौंद शाखा नहरें अब कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, जिससे किसानों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने सरकार से नहरों की मरम्मत और नई नहरों के निर्माण की मांग की, ताकि बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि को मजबूती मिल सके।इसके अलावा विधायक ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने क्षेत्र में चल रही विकास योजनाओं, विशेषकर महारानी लक्ष्मीबाई से संबंधित परियोजनाओं की सराहना करते हुए कहा कि सरकार यदि घाटों और नहरों के विकास पर विशेष ध्यान दे, तो कालपी का सर्वांगीण विकास संभव है।
फोटो परिचय- विधानसभा में बोलते विधायक विनोद चतुर्वेदी
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