सालाना तीन दिवसीय उर्स-ए-आलिया मुहम्मदिया का समापन


कालपी (जालौन)। दरगाह खानकाह शरीफ में हजरत मीर सैयद मुहम्मद रहमतुल्लाह अलैहे के सालाना तीन दिवसीय उर्स-ए-आलिया मुहम्मदिया का समापन शनिवार को कुल की रस्म के साथ अकीदत और एहतराम के माहौल में हुआ। अंतिम दिन दरगाह परिसर में कुल की फातिहा, तकरीर और लंगर का विशेष आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए।

कुल की महफ़िल में सज्जादानशीन सैय्यद गयासुद्दीन मियां ने कहा कि हुजूर पाक ने इंसानियत को सच्चाई, नेकी और भाईचारे का पैगाम दिया है। हमें अपने अमल को उसी राह पर ढालना चाहिए। उन्होंने नमाज की पाबंदी और शरीअत पर चलने की ताकीद करते हुए दीनी और दुनियावी तालीम दोनों को जरूरी बताया।
उन्होंने बलियों की सीरत पर रोशनी डालते हुए गौस पाक, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती अजमेरी सहित अन्य बुजुर्गों ने दीन की शिक्षाओं का उल्लेख किया और सुन्नियत की राह अपनाने की नसीहत दी। उन्होंने यह भी कहा कि खानकाह से जुड़े मदरसे को आगे चलकर विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि शिक्षा का दायरा और व्यापक हो सके। कार्यक्रम के दौरान अकीदतमंदों ने दरगाह पर फूल व चादर पेश कर फातिहा पढ़ी और देश की खुशहाली, समाज में अमन-चौन तथा तरक्की के लिए दुआएं मांगीं। उलेमा-ए-किराम और शायरों ने इस्लाहपरक तकरीरें और नात-ओ-मनकबत पेश कर माहौल को रूहानी रंग में रंग दिया। उर्स के समापन अवसर पर दरगाह परिसर व आसपास के विभिन्न स्थानों पर लंगर का वितरण किया गया। दूर-दराज से आए जायरीन ने लंगर ग्रहण कर आयोजन की सराहना की।
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हाफिज बनने वाले 14 विद्यार्थियों का हुआ सम्मान
उर्स के मौके पर मदरसा खानकाह मुहम्मदिया दारुल उलूम कालपी में हिफ्ज की मुकम्मल तालीम हासिल करने वाले 14 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। आयोजित कार्यक्रम में मौजूद उलेमा ने नव-हाफिजों को दुआओं से नवाजा और उनसे दीन की खिदमत व समाज में अच्छाई फैलाने की उम्मीद जताई। समारोह के अंत में सामूहिक दुआ के साथ उर्स का विधिवत समापन हुआ।
फोटो परिचय- हाफिज बनने वाले  विद्यार्थियों का सम्मान

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