रामचरित मानस हमें जीना व महाभारत मरना तथा रहना सिखाती है -रश्मि शास्त्री



उरई (जालौन)। आज बिना गुरु के भगवान तक पहुंचना संभव नहीं है। इंसान को जीवन में गुरू अवश्य बनाना चाहिए। गुरू हमारे जीवन का मार्गदर्शक है। जीवन में हमेशा खुश रहना चाहिए। मनुष्य का शरीर मिला है, थोड़ी बहुत परेशानियां तो आएंगी ही। लेकिन नियमित भागवत कथा सुनने से इन परेशानियों से मुक्त हो सकते हैं। बस जरूरत है तो इसे अपने जीवन में उतारने की। यह बात रश्मि शास्त्री ने  ग्राम बरसार में चल रहे विष्णु महायज्ञ  में  कही। 
उन्होंने कहा इन चार ग्रंथों का सार ही जीवन है। रामायण हमें जीना सिखाती है, महाभारत हमें मरना व मानव जीवन में कैसे रहना है यह महाभारत हमें सिखाती है। गीता हमें कर्म करना सिखाती है, और भागवत हमें मरना सिखाती है। जीवन में परिश्रम, चरित्र में पारदर्शिता, परिवार में प्रेम व रिश्तों में पवित्रता हमेशा बनाए राखिए।

 इस अवसर  यज्ञ संरक्षक रामकुमार शर्मा, अध्यक्ष धर्मपाल कौशिक ग्राम प्रधान, धर्मपाल सिंह राजपूत मुखिया, कोषाध्यक्ष रामबिहारी राजपूत,यज्ञ राजा इन्द्रपाल सिंह राजपूत, श्रीकान्त शर्मा स्पष्ट आवाज,सुघर सिंह राजपूत,चरन राजपूत लम्बरदार, अरविन्द सिंह राजपूत मुखिया पूर्व प्रधान, अर्जुन राजपूत मुखिया, मनमोहन कौशिक, अयोध्या प्रसाद राजपूत,ख्याली राजपूत, आदि मौजूद रहे।

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