0 रिकवरी की फाइले कई महीनों से कर रही कार्यवाही की आस
उरई(जालौन)। जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में आधा दर्जन ग्राम पंचायतों क़े लाखो रूपए की रिकवरी पर पर्दा डाल कर फाइले छुपा कर रखी गई है। इतना हीं नहीं इन ग्राम पंचायतो पर जिला पंचायत राज अधिकारी ने मानो ग्राम पंचायतो में तैनात सचिवों क़ो सरकारी धन क़ो हड़पने की छूट दे रखी है।
केस नंबर 1-
आप क़ो बतादे की जिले की ग्राम पंचायत मडोरा ब्लॉक डकोर में तैनात सचिव अर्चना कुशवाहा ने गौशाला में संरक्षित गौ वशो क़े नाम पर आने वाले धन क़े 1लाख 59 हजार का गवंन किया तो जांच क़े बाद आंच आते देख उन्हें डीपीआरओ ने हटा कर दूसरे न्याय पंचायत क़े गांव में तैनाती कर दी। और 4 माह से कार्यवाई इनके द्वारा नहीं की गई। जब की मडोरा में तो छोटी सी गौशाला थी। लेकिन अब पारतोष क़े रूप में 600गौवंशों वाली पियानिरंजनपुर की गौशाला का मालिक बना दिया है।
केस नंबर 2-
इसी तरह कुठौंद ब्लॉक की ग्राम पंचायत टिकरी मुस्तकिल में तैनात सचिव ने 70 हजार रुपया का गवन किया जिसकी भी जांच क़े बाद निकली 70 हजार रुपया क़े रिकवरी की फाइल 6 माह बीत जाने क़े बाद अभी तक कोई कार्यवाई नहीं की गई।
केस नंबर 3-
ठीक उसी तरह जिले की एक ग्राम पंचायत है जिसका नाम है मिर्जापुर यहां सचिव और प्रधान ने मिलकर ढाई लाख रुपया डकार लिए गए तो उसी क्रम में ग्रामीणों ने शिकायत कर जांच कराई जिसमे भी घोटाला खुल कर सामने 4माह पहले आ गया और जांच की फाइल डीपीआरओ कार्यालय में धूल फाक रही है पर आज तक रिकवरी जारी नहीं की गई।
केस नंबर 4-
वही ग्राम पंचायत घुसिया में तैनात सचिव और प्रधान ने मिल कर 1 लाख 50 हजार का घोटाला किया जिसकी फाइल भी जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय में कार्यवाई किये जाने की 5 माह से वाट हेर रहीं है पर इस गांव में तैनात सचिव प्रधान पर आशीर्वाद बनाए हुऐ है।
केस नंबर 5-
डी पी आर ओ का आशीर्वाद जिले की ग्राम पंचायत अहेता में तैनात सचिव और प्रधान पर बनाए हुऐ है यहां छोटी ग्राम पंचायत होने क़े कारण छोटी सी रकम पर हीं हाथ साफ कर पाया है जिसकी रकम मात्र 35 हजार हीं है फिर भी डी पी आर ओ की महरवानी बरकरार बनी हुई है।
केस नंबर 6-
ग्राम पंचायत पाल जो की महेवा ब्लॉक की ग्राम पंचायत है यहां क़े प्रधान है। पानसिंह निषाद जो बाहुबली जाने जाते है और इनके ऊपर करोड़ों रुपया का कार्य 4 वर्ष क़े कार्यकाल में दस्तावेजो में कराया लेकिन समय क़े बदलते चक्र की करवट ने अपना रंग दिखना सुरु किया और ग्रामीणों ने प्रधान क़े काले कारनामो का चिट्टा जिलाधिकारी क़ो शिकायती पत्र क़े माध्यम से सौंपा तो जिलाधिकारी ने तीन सदस्यसीय का गठन करते हुऐ मात्र 2024 में कराए गए कार्यों की जांच कराई तो 12 लाख रुपया की रिकवरी जांच होने क़े बाद निकल कर सामने आगई। इस गांव में तैनात सचिवों क़े और प्रधान क़े ऊपर भी जिलापंचायत राज अधिकारी अपनी छत्रछाया बनाए हुऐ है और यहां भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
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