(स्नेह लता रायपुरिया )
माधौगढ(जालौन) । कस्बा में स्थित राधिका गार्डन विवाह घर के परिसर में भगवान श्री परशुराम जी का अवतरण दिवस धूमधाम के साथ नगर पंचायत अध्यक्ष एडवोकेट राघवेन्द्र व्यास की अगुवाई में मनाया गया भगवान परशुराम जयंती पर अपने विचार प्रकट करते हुए चेयरमैन राघवेन्द्र व्यास ने कहा कि भगवान परशुराम के व्यक्तित्व को एक सामाजिक दृष्टिकोण से समझना है कि वह केवल एक योद्धा या विद्वान नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता के प्रेरक भी रहे हैं। भगवान परशुराम को अक्सर आवेशावतार के रूप में देखा जाता है, परंतु उनके कर्मों के पीछे जो तत्त्व था, वह था धर्म की पुर्नस्थापना।
भगवान परशुराम ने शक्ति का प्रयोग अनुशासन के लिए किया। उनका जीवन समरसता की प्रेरणा देता है पं.राहुल शर्मा ने कहा कि ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखें तो परशुराम एक ऐसे युग की उपज थे जहाँ सामाजिक असंतुलन चरम पर था। उन्होंने ब्राह्मण होते हुए भी युद्ध विद्या को अपनाया और सिखाई। पं. सुदेश मिश्रा ने कहा कि समरसता तब आती है जब शक्ति का वितरण न्यायपूर्ण होता है। परशुराम ने ब्राह्मण होते हुए भी अत्याचार का विरोध किया कि यह सामाजिक साहस था। भगवान परशुराम को सामाजिक न्याय के योद्धा के रूप में थे। पं. दीनबंधु द्विवेदी सभासद ने कहा कि परशुराम तपस्या और शक्ति का संतुलन हैं। वे क्षमाशील भी थे और कठोर भी। समरसता का मूल तत्त्व है-धर्माधारित जीवन। परशुराम ने कभी भी शक्ति का दुरुपयोग नहीं किया। इस मौके पर राजेश दीक्षित संजय गुबरेले राघवेन्द्र व्यास केशवानंद गौरीष दीक्षित दिनेश मिश्रा राम आसरे शर्मा आशीष दीक्षित आशुतोष द्बिवेदी नीरज समाधिया राहुल शर्मा देवेश तिवारी अजीत उपाध्याय दीपक रोहित प्रमोद मिश्रा सुदेश मिश्रा भूरे पाठक मुरारी दीनबंधु द्विवेदी शिवम फौजी नीतू दीक्षित सहित दर्जनों लोग मौजूद रहे है।
फोटो परिचय- श्री परशुराम जयन्ती पर माल्यार्पण करते हुए चेयरमैन और अन्य लोग
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