उरई नगर पालिका परिषद में ‘भ्रष्ट सभासदों’ की खुली पोल,


0 फर्जी कोटेशन से लेकर 10प्रतिशत कमीशनखोरी तक, वायरल लिस्ट से मचा हड़कंप
0खुद को ईमानदार बताने वालों के पैरों तले से खिसकी जमीन, अब प्रशासनिक जांच में घिरे सभासद
उरई (जालौन)। नगर पालिका परिषद उरई में सभासदों और अधिशासी अधिकारी (ईओ) के बीच चल रहा ‘चढ़ा संग्राम’ थमने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ सभासदों ने ईओ राम अचल कुरील के खिलाफ छह सूत्रीय मांग पत्र जिलाधिकारी को सौंपकर जांच की मांग की है, तो वहीं दूसरी तरफ वायरल एक पत्र ने खुद को ‘साफ सुथरा’ बताने वाले सभासदों के ‘ठेकेदार चरित्र’ को बेनकाब कर दिया है।यह पत्र आते ही आम जनमानस की उंगली सभासदों की ओर उठ गई है। अब साफ हो गया है कि सभासदों की असली लड़ाई अपने भ्रष्टाचार को छुपाने की है। यदि गहराई से जांच की गई, तो इन सभासदों के पैरों के नीचे से जमीन खिसक जाएगी।

जनप्रतिनिधि नहीं, ठेकेदार बनकर रह गए सभासद
जनता के चुने हुए प्रतिनिधि जब ठेकेदारी और कमीशनखोरी में लिप्त हों, तो यह लोकतंत्र के लिए कलंक है। वार्ड के विकास के नाम पर जनता को भरमाने वाले ये सभासद अब खुद कठघरे में खड़े हैं। यह समय शासन-प्रशासन के लिए चेतावनी है दृ कमीशन खोर सभासदों के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाए, नहीं तो यह भ्रष्टाचार और फलेगा-फूलेगा।

क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, नगर पालिका परिषद उरई में मचे घमासान की असली वजह कुछ और ही है। सभासदों ने ईओ राम अचल कुरील पर सहयोगात्मक रवैया न अपनाने, वार्डों में विकास कार्य न कराने और भुगतान प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। लेकिन अब मामला उलट गया है।
गुरुवार को सभासदों ने जिलाधिकारी से मिलकर निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके तुरंत बाद एक पत्र वायरल हो गया, जिसमें सभासदों के नाम के आगे उनकी अपनी या उनसे जुड़ी फर्मों और ठेकेदारों के नाम और लाखों रुपये के बकाया कोटेशन दर्ज हैं। यह स्पष्ट है कि ये सभासद फर्जी कोटेशन के भुगतान के लिए ही दबाव बना रहे थे। मामले की गंभीरता देखते हुए जिलाधिकारी ने एसडीएम जालौन रिंकू सिंह राही को जांच अधिकारी नामित किया है। वायरल पत्र भी जांच का हिस्सा बन चुका है।

वायरल लिस्ट में 20 सभासदों के नाम, किसका कितना बकाया ?
नगर पालिका के अभिलेखों से बाहर आई इस सूची में करीब 20 सभासदों के नाम हैं, जिनमें हर दल के लोग शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आधे से अधिक सभासद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदारी कर रहे हैं।इनमें रविंद्र राजपूत के हर्ष राजपूत 96,000 एवं सोमवती ठेकेदार 3 लाख विपिन सेठ के ओम कांट्रैक्टर 99,000 व बालाजी कांट्रैक्टर 95,000 अघोषित रूप से ठेकेदारी।आकाश त्रिवेदी बड़ा ठेकेदार चार फर्मों से जुड़े तन्हा कांट्रैक्टर 3.40 लाख, अखिलेश कुमार 3 लाख, प्रेम नारायण 90,000, बालाजी 1.90 लाख यह वही आकाश त्रिवेदी है जो शहीद पार्क निर्माण में मजदूरों को गाली-लाठियां मारता देखा गया था। अजय पटेल के ओम कांट्रैक्टर का सबसे बड़ा ₹5.60 लाख बकाया। उम्मेद यादव लल्ला यादव के ठेकेदार इंदु दुबे का ₹4.79 लाख। राहुल श्रीवास्तव के वीर सिंह ठेकेदार का ₹3.80 लाख नरेश सभासद से जुड़ी सिद्धिविनायक फर्म का ₹2.58 लाख पुष्पेंद्र प्रतिनिधि से जुड़ी सिद्धिविनायक फर्म का ₹3.28 लाख अनिल तिवारी के चंसोलिया ठेकेदार का ₹3.70 लाख देवेंद्र राठौर रू इंदु दुबे का 3.49 लाखदीपक वर्मा, राजू सरदार, वीरेंद्र, माता प्रसाद, जितेंद्र कुमार, सुशील राजपूत, उग्रसेन राजपूत  इनसे जुड़े ठेकेदारों के भी 1 लाख से 3 लाख रुपये तक के बकाया।

कमीशन का खुलासा भुगतान कराना हो तो 10प्रतिशत दो 
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका परिसर में सभासदों को खुलेआम यह कहते सुना जा सकता है।“जिस ठेकेदार को भुगतान कराना हो, वह भुगतान का 10 प्रतिशत मेरे पास जमा करें, भुगतान कर दिया जाएगा।” यह कमीशनखोरी की पराकाष्ठा है। ये लोग जनता के प्रतिनिधि हैं या कमीशन एजेंट, यह सवाल आम लोग उठाने लगे हैं।

फर्जी कोटेशनों के भुगतान के लिए मचा रहे चिल्लपों
ईओ के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सभासदों ने अपने ठेकेदारों के जरिए ऐसे कामों की सूची पालिका को सौंपी है, जो धरातल पर कराए ही नहीं गए। फर्जी वर्क ऑर्डर शामिल कराकर उनका भुगतान मांगा जा रहा है। जब काम मौके पर नहीं है, तो भुगतान कैसे होगा ? यही असली वजह है कि सभासदों ने पालिका में घमासान मचा रखा है।

बहुगुणा कार्यकाल के भी फर्जी कोटेशन
सूत्रों के अनुसार, कुछ सभासद पूर्व अध्यक्ष अनिल बहुगुणा के कार्यकाल के कोटेशनों का भुगतान कराने का दबाव बना रहे हैं, लेकिन यह बताने में असमर्थ हैं कि वे काम कहां कराए गए। पालिका कर्मचारी इन्हें पूरी तरह फर्जी बता रहे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि पूर्व पालिका अध्यक्ष द्वारा बैक डेट में कोटेशन पर साइन किए गए जो विवाद का कारण बने हुए 

प्रत्येक वर्क आर्डर की होगी स्थलीय जांच: ईओ
अधिशासी अधिकारी राम अचल कुरील ने साफ कहा कि“सभासदों द्वारा बेवजह दबाव बनाया जा रहा है। अब जो भी कोटेशन लंबित हैं, उनकी स्थलीय जांच कराई जाएगी। मौके पर यह देखा जाएगा कि काम हुआ भी या नहीं, और हुआ तो उसकी गुणवत्ता क्या रही। फर्जी वर्क ऑर्डर का भुगतान बिल्कुल नहीं होगा।”

जनता का सवाल- जनप्रतिनिधि या ठेकेदार ?
आम लोग बरबस यह सवाल उठा रहे हैं कि ये सभासद सम्माननीय जनप्रतिनिधि हैं या फिर ठेकेदार? जो अपने और अपने लोगों के फर्जी कोटेशनों के भुगतान के लिए पालिका में अराजकता फैला रहे हैं, कमीशन मांग रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं?

फर्जी कोटेशनों की एसआईटी से हो जांच
शासन-प्रशासन से सख्त मांग दोषी सभासदों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। सभी फर्जी कोटेशनों की एसआईटी से जांच कराई जाए। कमीशनखोरी करने वाले सभासदों को पद से हटाकर आजीवन निर्वाचित होने पर प्रतिबंध लगाया जाए।जनता की निगाहें अब प्रशासन पर हैं। देखना यह है कि भ्रष्ट सभासद बख्शे जाते हैं या सख्त कार्रवाई होती है।

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