-डीएम से शिकायत करने के बाद खुली पोल,मामला कदौरा विकास खंड के बवीना ग्राम पंचायत का
रईस अहमद
कदौरा(जालौन)। दबंग,गालीबाज और अश्लील हरकते करने वाला ग्राम पंचायत सचिव बवीना ने बात न मानने से तिलमिला कर पंचायत सहायक को तीन नोटिस एक ही दिन (7 अप्रैल 2026 ) को फोन पर भेजें और कार्यवाही के लिए ठेकेदारी प्रथा में अपने साझेदार एडीओ पंचायत कदौरा को प्रेषित कर दिए। भेजे गए नोटिस में क्रमशः 12/8/2026 और 23/12/2026 की तारीख डाली गई है।
जिसको बिना देखे एडीओ पंचायत देवेंद्र सिंह ने भी अपने व्यापारिक साझेदार ग्राम पंचायत सचिव के नोटिस पर आंख मूंद कर दिनांक 9/3/2026 को अंतिम कारण बताओ नोटिस जारी करके जवाब के लिए दो दिन का समय दिया।यह अलग बात है कि पीड़ित पंचायत सहायक को 7 अप्रैल को सभी नोटिस एक साथ प्राप्त हुए। इसी कारण पूरा मामला पूर्व प्रायोजित और उक्त दोनों अधिकारियों की सांठगांठ साबित करता है। जिससे साफ प्रतीत होता है कि दबाव बनाकर महिला कर्मचारी का मानसिक शोषण किया जा रहा था। ब्लाक के कुछ कर्मचारियों द्वारा नाम न बताने की शर्त पर बताया गया कि सचिव सुरेशचंद्र निषाद द्वारा स्थानीय निवासी होने के बावजूद भी ब्लाक परिसर में आवास लिया गया है। क्योंकि आए दिन इसी आवास में मांस मदिरा का सेवन और अजारकतत्वों के साथ बैठक होती है। पंचायत सहायक द्वारा की गई शिकायत से हड़कंप मचा हुआ है। ब्लॉक के कर्मचारियों की माने तो उक्त सचिव के पास जो ग्राम पंचायतों का चार्ज है वहां भी विरोध के स्वर उठ रहे है। जिले के अधिकारी कार्यवाही की बात कह रहे है।
पंचायत वाले सचिवों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही
ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी दोनों ही ग्राम पंचायत में कार्य करते हैं। इनको सचिव कहा जाता हैं। एक पंचायत विभाग से तो दूसरा विकास से संबंधित होता है। विकास विभाग के सचिवों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जाता है। एक दो शिकायतों में इनको बिना जांच के निलंबित कर दिया जाता है जबकि पंचायत से संबंधित सचिव की लाख शिकायत होने के बावजूद भी उन पर कोई प्रशासनिक कार्यवाही नहीं की जाती है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेशचंद्र निषाद है। जिसने पंडौरा सहित अन्य ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी कर के फर्जी भुगतान किए है जिसकी जांच हुई और दोषी पाया गया। इस पक्षपात पूर्ण व्यवहार का जिम्मेदार जिला पंचायतराज अधिकारी जालौन को बताया जाता है। विकास से संबंधित सचिवों ने कहा कि उनको टारगेट किया जाता है।
फोटो परिचय- सचिव के द्वारा दिया गया नोटिस
पंचायत वाले सचिवों पर क्यों नहीं होती कार्यवाही
ग्राम पंचायत अधिकारी और ग्राम विकास अधिकारी दोनों ही ग्राम पंचायत में कार्य करते हैं। इनको सचिव कहा जाता हैं। एक पंचायत विभाग से तो दूसरा विकास से संबंधित होता है। विकास विभाग के सचिवों के साथ पक्षपातपूर्ण व्यवहार किया जाता है। एक दो शिकायतों में इनको बिना जांच के निलंबित कर दिया जाता है जबकि पंचायत से संबंधित सचिव की लाख शिकायत होने के बावजूद भी उन पर कोई प्रशासनिक कार्यवाही नहीं की जाती है। इसका जीता जागता उदाहरण ग्राम पंचायत अधिकारी सुरेशचंद्र निषाद है। जिसने पंडौरा सहित अन्य ग्राम पंचायतों में ठेकेदारी कर के फर्जी भुगतान किए है जिसकी जांच हुई और दोषी पाया गया। इस पक्षपात पूर्ण व्यवहार का जिम्मेदार जिला पंचायतराज अधिकारी जालौन को बताया जाता है। विकास से संबंधित सचिवों ने कहा कि उनको टारगेट किया जाता है।
फोटो परिचय- सचिव के द्वारा दिया गया नोटिस
Post a Comment