(कैफ रजा)
कालपी(जालौन)। नगर स्थित सूफी संत हज़रत दीवान औलिया चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 143 वां सालाना उर्स अकीदत और रूहानियत के माहौल में प्रारंभ हो गया। उर्स की पहली रात आयोजित महफ़िल-ए-समां में देश के विभिन्न हिस्सों से आए मशहूर कव्वालों ने अपने कलाम पेश कर श्रद्धालुओं को पूरी रात झूमने पर मजबूर कर दिया।
उर्स के शुभारंभ पर दरगाह शरीफ में इंतजामिया कमेटी के सदस्यों एवं अकीदतमंदों की मौजूदगी में पारंपरिक गुस्ल की रस्म अदा की गई। दूर-दराज़ से आए जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर फातिहा पढ़ी और देश में अमन, खुशहाली व आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। दरगाह परिसर में चादरपोशी और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
रात में आयोजित महफ़िल-ए-समां में मुंबई के कव्वाल कौसर सावरी और राजस्थान के फैज़ान अजमेरी ने नात, मनकबत, ग़ज़ल और सूफियाना कलाम पेश कर माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया। कौसर सावरी के मशहूर कलाम “मैं अली का दीवाना, क्या बिगाड़ेगा जमाना” पर मौजूद अकीदतमंदों ने तालियों की गूंज के साथ भरपूर दाद दी। पूरी दरगाह सूफियाना रंग में रंगी नजर आई और देर रात तक कव्वाली का सिलसिला चलता रहा।
महफ़िल में बड़ी संख्या में जायरीन और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन समिति के अनुसार उर्स की दूसरी रात भी महफ़िल-ए-समां का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अहमदाबाद के अनीश नवाब और आमिल आरिफ अपने कलाम से महफ़िल को सजाएंगे।इस अवसर पर दीवान अतीक सिद्दीकी, दानिश दीवान, प्रवेश कुरैशी, साजिद, आसिफ कुरैशी, सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फोटो परिचय-उर्स की पहली रात दरगाह परिसर में आयोजित कव्वाली की महफ़िल का दृश्य
कालपी(जालौन)। नगर स्थित सूफी संत हज़रत दीवान औलिया चिश्ती रहमतुल्लाह अलैह का 143 वां सालाना उर्स अकीदत और रूहानियत के माहौल में प्रारंभ हो गया। उर्स की पहली रात आयोजित महफ़िल-ए-समां में देश के विभिन्न हिस्सों से आए मशहूर कव्वालों ने अपने कलाम पेश कर श्रद्धालुओं को पूरी रात झूमने पर मजबूर कर दिया।
उर्स के शुभारंभ पर दरगाह शरीफ में इंतजामिया कमेटी के सदस्यों एवं अकीदतमंदों की मौजूदगी में पारंपरिक गुस्ल की रस्म अदा की गई। दूर-दराज़ से आए जायरीनों ने दरगाह पर हाजिरी लगाकर फातिहा पढ़ी और देश में अमन, खुशहाली व आपसी भाईचारे की दुआ मांगी। दरगाह परिसर में चादरपोशी और अन्य धार्मिक कार्यक्रमों का सिलसिला दिनभर चलता रहा।
रात में आयोजित महफ़िल-ए-समां में मुंबई के कव्वाल कौसर सावरी और राजस्थान के फैज़ान अजमेरी ने नात, मनकबत, ग़ज़ल और सूफियाना कलाम पेश कर माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया। कौसर सावरी के मशहूर कलाम “मैं अली का दीवाना, क्या बिगाड़ेगा जमाना” पर मौजूद अकीदतमंदों ने तालियों की गूंज के साथ भरपूर दाद दी। पूरी दरगाह सूफियाना रंग में रंगी नजर आई और देर रात तक कव्वाली का सिलसिला चलता रहा।
महफ़िल में बड़ी संख्या में जायरीन और स्थानीय लोग मौजूद रहे। आयोजन समिति के अनुसार उर्स की दूसरी रात भी महफ़िल-ए-समां का आयोजन किया जाएगा, जिसमें अहमदाबाद के अनीश नवाब और आमिल आरिफ अपने कलाम से महफ़िल को सजाएंगे।इस अवसर पर दीवान अतीक सिद्दीकी, दानिश दीवान, प्रवेश कुरैशी, साजिद, आसिफ कुरैशी, सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
फोटो परिचय-उर्स की पहली रात दरगाह परिसर में आयोजित कव्वाली की महफ़िल का दृश्य
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