(कैफ रजा )
कालपी(जालौन) । खाड़ी देश में चल रहे युद्ध की वजह से कालपी में उत्पादित होने वाले कालीन उद्योग में भारी प्रभाव पड़ा है। निर्यात घट जाने की वजह से कालीन के दामों में गिरावट आई है तथा बिक्री भी पूरी तरह से प्रभावित हुई है।
इस विषय में कालीन निर्माता समिति के अध्यक्ष हाजी एहसान ने बताया कि पिछले महीने तक कालपी उत्पादित कालीन ग्वालियर मंडी में 600 रूपये प्रति वर्ग फुट में बिकती रहती थी। लेकिन अब इजरायल, अमेरिका, ईरान युद्ध तथा अमेरिकी टैरिफ में कमी के कारण कालीन की बिक्री पर असर पड़ा हुआ है। वर्तमान में कालीन के दाम 520 रुपए वर्ग फुट रह गया है। इसके अलावा बिक्री पर प्रभाव पड़ने से कालीन का स्टॉक डम्प हो गया है।
विदित हो कि कालीन में प्रयुक्त होने वाली ऊन के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। पहले उनके दाम 300 रुपए प्रति किलोग्राम रहती थी। लेकिन अब कालीन की उन 350 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। कालीन के कारीगर की बुनाई में गिरावट हो गई है। कालीन निर्मित तथा बुनकरों रहीम बेग, मोहसिन, मुजिम अल्लामा, कल्लू, अच्छे, रामकुमार साहू आदि बुनकरों में बेचौनी फैल गई है।
फोटो परिचय- कालीन बुनकर एवं निर्माता
कालपी(जालौन) । खाड़ी देश में चल रहे युद्ध की वजह से कालपी में उत्पादित होने वाले कालीन उद्योग में भारी प्रभाव पड़ा है। निर्यात घट जाने की वजह से कालीन के दामों में गिरावट आई है तथा बिक्री भी पूरी तरह से प्रभावित हुई है।
इस विषय में कालीन निर्माता समिति के अध्यक्ष हाजी एहसान ने बताया कि पिछले महीने तक कालपी उत्पादित कालीन ग्वालियर मंडी में 600 रूपये प्रति वर्ग फुट में बिकती रहती थी। लेकिन अब इजरायल, अमेरिका, ईरान युद्ध तथा अमेरिकी टैरिफ में कमी के कारण कालीन की बिक्री पर असर पड़ा हुआ है। वर्तमान में कालीन के दाम 520 रुपए वर्ग फुट रह गया है। इसके अलावा बिक्री पर प्रभाव पड़ने से कालीन का स्टॉक डम्प हो गया है।
विदित हो कि कालीन में प्रयुक्त होने वाली ऊन के दामों में बढ़ोतरी हो गई है। पहले उनके दाम 300 रुपए प्रति किलोग्राम रहती थी। लेकिन अब कालीन की उन 350 रुपए प्रति किलोग्राम हो गई है। कालीन के कारीगर की बुनाई में गिरावट हो गई है। कालीन निर्मित तथा बुनकरों रहीम बेग, मोहसिन, मुजिम अल्लामा, कल्लू, अच्छे, रामकुमार साहू आदि बुनकरों में बेचौनी फैल गई है।
फोटो परिचय- कालीन बुनकर एवं निर्माता
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