(हिमांशु खरकिया)
उरई(जालौन)। यहाँ के दयानन्द वैदिक कॉलेज, जो बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी से सम्बद्ध है, पर एक अनुसूचित जाति के छात्र के साथ अन्याय और लापरवाही बरतने का गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज के एम.एड. विभाग पर आरोप है कि उसने एक छात्र को उसकी पढ़ाई पूरी करने के छह साल बाद भी डिग्री नहीं दी है, साथ ही उसके साथ जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न भी किया गया।
प्रार्थी विनोद कुमार, पुत्र नरेन्द्र कुमार, निवासी ग्राम ऐदलपुर, जनपद जालौन ने बताया कि उनका दाखिला सत्र 2017-19 में एम.एड. पाठ्यक्रम में हुआ था। अनुसूचित जाति के छात्र होने के कारण उनका चयन सरकार द्वारा निर्धारित शून्य शुल्क कोटे के तहत हुआ था। उनका आरोप है कि जब पहले वर्ष में तो कॉलेज ने कोई फीस नहीं ली, लेकिन दूसरे वर्ष में उन्हें पूरी फीस जमा करने के लिए बाध्य किया गया।
आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण जब विनोद पर फीस जमा करने का दबाव बढ़ा, तो उन्होंने इसकी शिकायत कुलाधिपति और जिलाधिकारी से की। यह मामला स्थानीय अखबारों में भी छपा। इससे नाराज होकर, तत्कालीन विभागाध्यक्ष (भ्व्क्) एम.एड. डॉ. सुरेन्द्र कुमार यादव और क्लर्क रामजी समाधिया ने विनोद को धमकी दी कि यदि उन्होंने सुलहनामा नहीं लिखा तो उनका भविष्य खराब कर दिया जाएगा। विवश होकर विनोद ने उस समय सुलहनामा लिख दिया था।इतना ही नहीं, विनोद का आरोप है कि दूसरे वर्ष की प्रायोगिक परीक्षा में विभागाध्यक्ष ने जातिगत भेदभाव करते हुए उन्हें जानबूझकर केवल पासिंग मार्क्स दिए। जबकि लिखित परीक्षा में उनसे कम अंक पाने वाले अन्य छात्रों को प्रायोगिक परीक्षा में उनसे अधिक अंक दिए गए। उन्होंने इसकी जाँच के लिए सभी छात्रों की मार्कशीट देखे जाने की माँग की है।
सबसे बड़ी समस्या डिग्री को लेकर है। विनोद ने बताया कि वह पिछले 6 साल से डिग्री पाने के लिए कॉलेज के चक्कर लगा रहे हैं। बहुत मिन्नतों के बाद उन्हें मार्कशीट तो दे दी गई, लेकिन डिग्री आज तक नहीं दी गई। जब भी वह कॉलेज जाते हैं, कर्मचारियों द्वारा उन्हें ष्डिग्री अभी नहीं आई हैष्, ष्घर आ जाएगीष् या ष्कल आनाष् जैसे बहानों से टाल दिया जाता है।
परेशान होकर जब विनोद ने क्लर्क रामजी समाधिया से फोन और व्हाट्सएप पर संपर्क किया तो भी कोई हल नहीं निकला। विनोद का कहना है कि उनकी पूरी फीस भी जमा हो चुकी है। इसके बावजूद 6 साल बाद उनसे फीस की रसीद मांगी गई, जो उन्होंने उपलब्ध भी करा दी, लेकिन डिग्री जारी नहीं की गई।
अंततः विनोद कुमार ने अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग, नई दिल्ली से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि उनकी डिग्री शीघ्र दिलाई जाए तथा कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जाँच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, जिससे उन्हें छह वर्षों के इस लंबे संघर्ष से मुक्ति मिल सके।
इनसेट-
डिग्री नहीं देने का मामले में आयोग ने जारी किया नोटिस
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी को नोटिस जारी कर जालौन के दयानंद वैदिक कॉलेज में अनुसूचित जाति के छात्र विनोद कुमार के साथ कथित जातिगत भेदभाव और आर्थिक प्रताड़ना का संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव को 15 दिनों के भीतर मामले में की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में जवाब न मिलने पर आयोग संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सीधे समन जारी कर सकता है।
उरई(जालौन)। यहाँ के दयानन्द वैदिक कॉलेज, जो बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झाँसी से सम्बद्ध है, पर एक अनुसूचित जाति के छात्र के साथ अन्याय और लापरवाही बरतने का गंभीर मामला सामने आया है। कॉलेज के एम.एड. विभाग पर आरोप है कि उसने एक छात्र को उसकी पढ़ाई पूरी करने के छह साल बाद भी डिग्री नहीं दी है, साथ ही उसके साथ जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न भी किया गया।
प्रार्थी विनोद कुमार, पुत्र नरेन्द्र कुमार, निवासी ग्राम ऐदलपुर, जनपद जालौन ने बताया कि उनका दाखिला सत्र 2017-19 में एम.एड. पाठ्यक्रम में हुआ था। अनुसूचित जाति के छात्र होने के कारण उनका चयन सरकार द्वारा निर्धारित शून्य शुल्क कोटे के तहत हुआ था। उनका आरोप है कि जब पहले वर्ष में तो कॉलेज ने कोई फीस नहीं ली, लेकिन दूसरे वर्ष में उन्हें पूरी फीस जमा करने के लिए बाध्य किया गया।
आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर होने के कारण जब विनोद पर फीस जमा करने का दबाव बढ़ा, तो उन्होंने इसकी शिकायत कुलाधिपति और जिलाधिकारी से की। यह मामला स्थानीय अखबारों में भी छपा। इससे नाराज होकर, तत्कालीन विभागाध्यक्ष (भ्व्क्) एम.एड. डॉ. सुरेन्द्र कुमार यादव और क्लर्क रामजी समाधिया ने विनोद को धमकी दी कि यदि उन्होंने सुलहनामा नहीं लिखा तो उनका भविष्य खराब कर दिया जाएगा। विवश होकर विनोद ने उस समय सुलहनामा लिख दिया था।इतना ही नहीं, विनोद का आरोप है कि दूसरे वर्ष की प्रायोगिक परीक्षा में विभागाध्यक्ष ने जातिगत भेदभाव करते हुए उन्हें जानबूझकर केवल पासिंग मार्क्स दिए। जबकि लिखित परीक्षा में उनसे कम अंक पाने वाले अन्य छात्रों को प्रायोगिक परीक्षा में उनसे अधिक अंक दिए गए। उन्होंने इसकी जाँच के लिए सभी छात्रों की मार्कशीट देखे जाने की माँग की है।
सबसे बड़ी समस्या डिग्री को लेकर है। विनोद ने बताया कि वह पिछले 6 साल से डिग्री पाने के लिए कॉलेज के चक्कर लगा रहे हैं। बहुत मिन्नतों के बाद उन्हें मार्कशीट तो दे दी गई, लेकिन डिग्री आज तक नहीं दी गई। जब भी वह कॉलेज जाते हैं, कर्मचारियों द्वारा उन्हें ष्डिग्री अभी नहीं आई हैष्, ष्घर आ जाएगीष् या ष्कल आनाष् जैसे बहानों से टाल दिया जाता है।
परेशान होकर जब विनोद ने क्लर्क रामजी समाधिया से फोन और व्हाट्सएप पर संपर्क किया तो भी कोई हल नहीं निकला। विनोद का कहना है कि उनकी पूरी फीस भी जमा हो चुकी है। इसके बावजूद 6 साल बाद उनसे फीस की रसीद मांगी गई, जो उन्होंने उपलब्ध भी करा दी, लेकिन डिग्री जारी नहीं की गई।
अंततः विनोद कुमार ने अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग, नई दिल्ली से मदद की गुहार लगाई है। उन्होंने आयोग से अनुरोध किया है कि उनकी डिग्री शीघ्र दिलाई जाए तथा कॉलेज प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जाँच कराकर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, जिससे उन्हें छह वर्षों के इस लंबे संघर्ष से मुक्ति मिल सके।
इनसेट-
डिग्री नहीं देने का मामले में आयोग ने जारी किया नोटिस
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी को नोटिस जारी कर जालौन के दयानंद वैदिक कॉलेज में अनुसूचित जाति के छात्र विनोद कुमार के साथ कथित जातिगत भेदभाव और आर्थिक प्रताड़ना का संज्ञान लिया है। आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए कुलसचिव को 15 दिनों के भीतर मामले में की गई कार्रवाई से अवगत कराने का निर्देश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि निर्धारित अवधि में जवाब न मिलने पर आयोग संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते हुए सीधे समन जारी कर सकता है।
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