जगम्मनपुर,(जालौन)। अतिक्रमण के कारण सैकड़ों वर्ष पुराना सार्वजनिक रास्ता पूरी तरह बंद होकर अब नाले के रूप में परिवर्तित हो गया है। विकासखंड रामपुरा अंतर्गत स्थित यह ऐतिहासिक कस्बा कभी राजतंत्र काल में जगम्मनपुर (कनार) रियासत की राजधानी के रूप में विख्यात रहा है। जनपद जालौन का प्रमुख और घनी आबादी वाला यह क्षेत्र पूर्व में सुव्यवस्थित मार्गों और सुदृढ़ जल निकासी व्यवस्था के लिए जाना जाता था।
इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि विभिन्न राजाओं द्वारा इस कस्बे को सुनियोजित ढंग से विकसित किया गया था। गांव की चौड़ी एवं स्वच्छ गलियां तथा जल निकासी की बेहतर व्यवस्था इसकी विशेष पहचान थी। किंतु वर्ष 1952 में राजतंत्र समाप्त होने और लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू होने के बाद धीरे-धीरे कुछ लोगों ने स्वतंत्रता को स्वेच्छाचारिता समझ लिया। परिणामस्वरूप सार्वजनिक मार्गों और नालियों पर अतिक्रमण की प्रवृत्ति बढ़ती चली गई।
किला क्षेत्र के पीछे वार्ड संख्या 3 स्थित चंदेल मोहल्ला में गांव बसने के समय से ही आम लोगों के आवागमन के लिए एक चौड़ा रास्ता मौजूद था। प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से गुजरते थे। लेकिन बीते 25-30 वर्षों में कुछ लोगों ने अपने मकानों की सीमा बढ़ाकर इस रास्ते पर कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं, कई घरों के शौचालयों और परनालों का पानी भी इसी सार्वजनिक मार्ग में छोड़ा जाने लगा। परिणामस्वरूप कभी स्वच्छ और चौड़ा रहा यह रास्ता अब संकरे व गंदे नाले में तब्दील हो चुका है।
स्थिति की विडंबना यह है कि समय-समय पर निर्वाचित जनप्रतिनिधियों ने गांव के विकास के इस गंभीर मुद्दे पर अपेक्षित कठोरता नहीं दिखाई। किसी से टकराव से बचने की प्रवृत्ति के कारण यह समस्या बढ़ती चली गई और आज यह मार्ग लगभग पूरी तरह अवरुद्ध हो चुका है।
मोहल्लावासियों हरेंद्र सिंह चंदेल, कुल्लू सिंह चंदेल, नत्थू खां, सब्बीर अली, रामराज सिंह चंदेल, रामकेश शाक्यवार सहित अनेक ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिक्रमण हटवाने, मार्ग की साफ-सफाई कराने तथा जल निकासी के लिए समुचित नाली निर्माण की मांग की है।ग्राम प्रधान प्रज्ञादीप गौतम ने बताया कि उक्त मार्ग के पुनर्निर्माण के लिए कार्ययोजना तैयार कर ली गई है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य प्रारंभ करा दिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव में सुविधायुक्त और सतत विकास सुनिश्चित करना है तो सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण मुक्त रखना तथा जल निकासी की समुचित व्यवस्था करना अनिवार्य है। स्वच्छ मार्ग और सुचारू नालियां ही किसी भी गांव की स्वच्छता और सुव्यवस्था की आधारशिला होती हैं।
फोटो परिचय- गंदे नाले में तब्दील हो चुका रास्ता
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