जालौन। केंद्र सरकार पर किसान एवं मजदूर विरोधी नीतियों को लागू किए जाने का आरोप लगाते हुए वामपंथी दलों के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित 14 सूत्रीय मांग पत्र नायब तहसीलदार को सौंपकर उन पर रोक लगाने की मांग की।
श्रम संगठनों के आवाहन पर चारों श्रम संहिताओं को लागू करने के खिलाफ विभिन्न वामपंथी दल सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (माले) द्वारा आम हड़ताल की घोषणा की गई थी। इसका नगर में कोई खास असर नहीं दिखा। हालांकि वामपंथी दलों के पदाधिकारी राम औतार दोहरे, खलील, डां रामकिशोर गुप्ता, कांशीराम, फूलसिहं, मुहम्मद अनीस क़ुरैशी, सुरेन्द्र कुमार, केशभान, रामबाबू आदि ने राष्ट्रपति को संबोधित 14 सूत्रीय मांग पत्र नायब तहसीलदार सतेन्द्र कुमार गुप्ता को सौपकर चारो श्रम संहिता रद्द करने, बिजली संशोधन विधेयक 2025, बीज संशोधन विधेयक 2025 को वापस लेने, मनरेगा योजना का बदला हुआ नाम निरस्त करने, प्रदेश में न्यूतम वेतन 26000 रुपये किए जाने, सभी को स्थाई रोजगार, संविदा नीति को बन्द करने, पुरानी पेंशन योजना बहाल करने, शिक्षा स्वास्थ्य, बिजली, रेलवे, कोयला, तेल, मिल आदि सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण पर रोक लगाने, ई-श्रम और बीओसी बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों को आयुष्मान कार्ड जारी समेत 14 सूत्रीय मांगों को पूरा किए जाने की मांग की है। साथ ही भारत अमेरिका व्यापार समझौता निरस्त किया जाने की भी मांग की गई।
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