(स्नेहलता रायपुरिया)
---जिला विद्यालय निरीक्षक ने निरस्त की अनुमति
कालपी (जालौन)। नगर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान एम.एस.वी. इंटर कॉलेज, कालपी के मैदान में चल रही मकर संक्रांति प्रदर्शनी को आखिरकार बंद कर दिया गया है। माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के स्पष्ट आदेशों के अनुपालन में जिला विद्यालय निरीक्षक, जालौन (उरई) ने पूर्व में दी गई अनुमति को निरस्त करते हुए कॉलेज प्रशासन को तत्काल प्रभाव से प्रदर्शनी बंद कराने के निर्देश जारी किए हैं। इस कार्रवाई से नगर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है, वहीं प्रदर्शनी बंद होने से स्थानीय लोगों में मायूसी भी देखी जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार टरननगंज स्थित नुमाइश मैदान समाप्त होने के बाद बीते कई वर्षों से एम.एस.वी. इंटर कॉलेज के मैदान में प्रत्येक वर्ष मकर संक्रांति के अवसर पर लगभग एक माह तक मेले व प्रदर्शनी का आयोजन किया जाता रहा है। इसी क्रम में इस वर्ष भी 11 जनवरी 2026 से प्रदर्शनी प्रारंभ हुई थी। लेकिन नगर निवासी अनिल कुमार पुरवार ने माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित जनहित याचिका (पीआईएल) संख्या-542 सन् 2025 का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई, जिसमें शिक्षण संस्थानों के परिसरों में मेलों एवं व्यावसायिक प्रदर्शनियों पर रोक लगाने का आदेश पारित किया गया है।
अनिल कुमार पुरवार द्वारा इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक को प्रार्थना पत्र दिए जाने के बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया। जिलाधिकारी जालौन ने प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक राजकुमार पंडित ने कॉलेज परिसर में प्रदर्शनी लगाने से संबंधित पूर्व में निर्गत सभी आदेशों को निरस्त करते हुए तत्काल प्रभाव से प्रदर्शनी पर रोक लगा दी।
इस संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा एम.एस.वी. इंटर कॉलेज के प्रबंधक/प्रधानाचार्य, उपजिलाधिकारी कालपी तथा कोतवाली पुलिस को पत्र भेजकर प्रदर्शनी बंद कराने एवं उसी दिन की गई कार्रवाई की आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। उपजिलाधिकारी कालपी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि अनुमति निरस्त कर दी गई है और प्रदर्शनी संचालक को तत्काल प्रदर्शनी बंद करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को भी सूचित किया गया है।
प्रदर्शनी बंद होने से जहां एक ओर हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन को लेकर प्रशासन की कार्रवाई की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर महज नौ दिनों में मेला बंद होने से नगर व क्षेत्र के लोग मायूस नजर आए। स्थानीय व्यापारियों और बच्चों में खासा उत्साह था, जो अचानक समाप्त हो गया। हालांकि प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेश सर्वोपरि हैं और उनका पालन करना अनिवार्य है।
कुल मिलाकर, यह मामला शैक्षणिक परिसरों की पवित्रता, कानून के पालन और परंपरागत आयोजनों के बीच संतुलन का एक अहम उदाहरण बनकर सामने आया है, जिस पर आने वाले दिनों में भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।
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