-जिम्मेदारों की छाती पर मूंग दल रहे मिट्टी माफिया,
-बनफरा व चुरखी रोड पर ओवरलोड ट्रैक्टरों की धमा चौकड़ी
-2 दिसंबर की रात बने बनफरा रोड की हुलिया बिगाड़ी मिट्टी माफियाओं ने
-ओवरलोडे ट्रैक्टरों के चलते साइकिल से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे
-रोड को उधेड़ने में लगे एक ट्रैक्टर को पकड़ कर ग्रामीणों ने डायल 112 को सोपा
जालौन के मुख्यालय उरई में मिट्टी माफियाओं का खौफ़ आम आदमी के सिर चढ़कर बोल रहा है चुरखी रोड और उससे निकले बनफरा रोड पर चल पाना लोगों के बस की बात नहीं है इन सड़कों पर सुबह मॉर्निंग वॉक के लिए जाने वाले लोग दहशत में है कि न जाने कब तेज रफ्तार निकलने वाला मिट्टी से लदा ओवरलोड ट्रैक्टर उन्हें टक्कर ना मार दे।
बनफरा रोड की तो हालत और भी खराब है 2 दिसंबर को चुर्खी रोड उरई विकास प्राधिकरण के बगल से निकले चिरौंजी लाल चौराहे तक जाने वाले बनफरा रोड पर ओवरलोड मिट्टी ट्रैक्टरों की धमा चौकड़ी ने ग्राम बनफरा से पढ़ने उरई आने वाले बच्चों के अभिभावकों के मन में दहशत भर दी है क्योंकि साइकिल से पढ़ने जाने वाले बच्चों को तेज रफ्तार ओवरलोड ट्रैक्टरों का सामना करना पड़ता है और अगर जरा सा चुके तो फिर ऊपर वाला ही मालिक है।
ट्रैक्टरों की धमा चौकड़ी से परेशान ग्राम बनफरा के ग्रामीणों का गुस्सा तब और फूट पड़ा जब मिट्टी से भरा ओवरलोड ट्रैक्टर रोड पर फंस गया और फिर नए बने रोड को निकालने के चक्कर में उधेड़ने लगा आक्रोषित ग्रामीणों ने डायल 112 बुलाकर शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन उसका कुछ भी परिणाम नहीं निकला क्योंकि रात के समय ओवरलोड मिट्टी ट्रैक्टरों की धमा चौकड़ी फिर से शुरू हो गई। अब लाखों की लागत से बने बनफरा रोड को मिट्टी माफिया कब तक सलामत रहने देंगे यह तो समय बताएगा लेकिन ओवरलोड ट्रैक्टरों की रफ्तार ने मॉर्निंग बाक के लिए निकलने वाले सीनियर सिटीजन को घर में कैद रहने के लिए मजबूर कर दिया है कमोबेश यही हाल चुरकी रोड का भी है चक जगदेवपुर, अमगुवा, गुढ़ा आदि आसपास के गांव में दिन रात जेसीबी धरती का सीना चीर रही है जिसकी आवाज जिम्मेदारों को सुनाई नहीं दे रही है अब ऐसा भी नहीं है कि जिम्मेदारों को मिट्टी माफियाओं के बारे में जानकारी ना हो लेकिन जिस तरह से मिट्टी माफियाओं को संरक्षण दिया जा रहा है वह जिम्मेदारों की नियत में खोट को उजागर कर रहा है।
फिलहाल तो हर रोज मॉर्निंग वॉक के लिए निकलने वाले संभरान्त जनों ने जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित करते हुए मांग की है कि भले ही मिट्टी माफियाओं से साठ गांठ बनी रहे और मिट्टी का अवैध खनन होता रहे लेकिन सड़कों पर फर्राटा भरने वाले ओवरलोड ट्रैक्टरों की रफ्तार को जरूर धीमा करवा दिया जाए जिससे राह चलने वाले मॉर्निंग वॉक को निकालने वाले लोगों को ट्रैक्टरों से कुचलकर मरने का खतरा महसूस ना हो और ग्राम बनफरा के लोग फिर से अपने बच्चों को स्कूल भेजने में हिचक महसूस ना करें।
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