एक ही परिवार में मृतक आश्रित कोटे में कर डाली दो अवैध नियुक्तियाँ


-अनुकंपा नियुक्ति के नाम पर बीएसए ने खेला भ्रष्टाचार का खेल
 राजेश द्विवेदी
उरई(जालौन)। जनपद जालौन में बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी चन्द्र प्रकाश पर नजराना लेकर एक ही परिवार में मृतक आश्रित कोटे के तहत दो अवैध नियुक्तियाँ करने का गंभीर आरोप लगा है। साथ ही आरोप है कि नियुक्ति में फर्जी अंकपत्र और प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया।
    समाजसेवी मोहम्मद अशफाक राइन ने अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) को प्रेषित एक गोपनीय पत्र में यह पूरा मामला उजागर किया गया है। सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद अब बेसिक शिक्षा अधिकारी दोनों प्रकरणों को दबाने के प्रयासों में जुट गये हैं। तो वहीं बीएसए कार्यालय में मामले का खुलासा होते ही ऐसी चर्चायें चल रही है कि किसके हाथ किसकी गर्दन है यह तो जांच पूरी होने के बाद ही पता चल सकेगा।

पहला मामला पिता के सेवारत रहते बेटी को नौकरी
शिकायत के अनुसार बीएसए कार्यालय में लिपिक योगेश खरे की पहली पत्नी मोहनी खरे (सरकारी शिक्षिका) की मृत्यु हो गई थी। उस समय बीएसए प्रेमचन्द्र यादव ने यह कहते हुए पुत्री पूजा खरे का आवेदन खारिज कर दिया था कि पिता के सेवारत होने पर मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति नहीं हो सकती। लेकिन बाद में जब बेसिक शिक्षाधिकारी चन्द्र प्रकाश आए, तो कथित तौर पर उन्होंने कार्यालय के लिपिक अमित सक्सेना (योगेश खरे के दामाद) से सांठगांठ कर 10 लाख रुपये लेकर पूजा खरे की अवैध नियुक्ति कर दी। आरोप है कि नियुक्ति के लिए पूजा खरे की बीटीसी मार्कशीट सहित कई प्रमाणपत्र फर्जी और कूटरचित बनाए गए। सूत्रों के अनुसार, अवैध नियुक्ति के एवज में पूजा खरे द्वारा हर माह बीएसए के पास कटमनी पहुंचायी जा रही है।

स्कूल में दूसरी पत्नी की मौत के बाद बेटे को नौकरी
दूसरा प्रकरण और भी चौंकाने वाला है लिपिक योगेश खरे की दूसरी पत्नी रमा खरे (अशासकीय स्कूल में सहायक अध्यापिका) की मृत्यु के बाद बेसिक शिक्षाधिकारी चन्द्र प्रकाश ने कथित तौर पर फिर से सुकराना लेकर योगेश खरे के बेटे शुभम चित्रांश की नियुक्ति संजय गाँधी जूनियर हाई स्कूल बरोदा कला में कर दी। शिकायत में कहा गया है कि उस समय उक्त स्कूल की प्रबंध समिति भंग थी और एकल परिचालन चल रहा था। नियमानुसार एकल परिचालन के दौरान कोई नियुक्ति पूर्णतया अवैध होती है। इसके बाबजूद बेसिक शिक्षा अधिकारी ने नजराना लेकर इस नियुक्ति को अनुमोदन भी दे दिया।

मास्टरमाइंड कौन?
पूरे मामले के मास्टरमाइंड अमित सक्सेना (लिपिक बीएसए कार्यालय) को बताया जा रहा है, जो पूजा खरे के पति और शुभम के बहनोई हैं। वह बीएसए कार्यालय में “कमाऊ पूत” के नाम से कुख्यात हैं। आरोप है कि अमित और प्रणव मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार करते हैं। इतना ही नहीं, पूरे जनपद में मृत कर्मचारियों का एक-एक साल तक वेतन निकालने का खेल भी चल रहा है। मरने के बाद भी वेतन जारी रखा जा रहा है, जबकि परिवार को पेंशन और मृतकाश्रित नौकरी दी जा चुकी है।

मृत कर्मचारियों के वेतन घोटाले की उच्च स्तरीय जांच हो
शिकायतकर्ता ने अपर मुख्य सचिव से कार्रवाई मांग करते हुए पूजा खरे और शुभम चित्रांश की नियुक्तियां रद्द कर बर्खास्त किया जाए। सरकारी राजकोष से निकाली गई करोड़ों की राशि की वसूली की जाए। बीएसए चन्द्र प्रकाश और साजिश में शामिल सभी लिपिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। जनपद में हुए सभी फर्जी नियुक्तियों और मृत कर्मचारियों के वेतन घोटाले की उच्च स्तरीय जांच कराये जाने की मांग की है।

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